पटना। जनता दल (यूनाइटेड) की नई प्रदेश कमिटी के गठन के बाद बिहार की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म है। पार्टी के भीतर असंतोष और पदों के बदले पैसे लेने के आरोपों पर पूर्व प्रदेश महासचिव साकेत सिंह ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि जेडीयू में कोई नाराजगी नहीं है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व का बचाव करते हुए इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

​आरोपों पर साकेत सिंह का कड़ा रुख

​पार्टी में पदों को लेकर लग रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए साकेत सिंह ने कहा कि बेबुनियाद आरोप लगाने से कोई बात साबित नहीं हो जाती। उन्होंने स्पष्ट किया कोई भी किसी पर कुछ भी आरोप लगा सकता है लेकिन आरोप लगाने वाले को उसे प्रमाणित भी करना चाहिए। केवल बयानबाजी करने से हकीकत नहीं बदलती।

​मीडिया के बजाय नेतृत्व से करें बात

​साकेत सिंह ने असंतुष्ट नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि यदि किसी कार्यकर्ता को कमिटी के गठन पर कोई आपत्ति है तो उसे मीडिया में बयान देने के बजाय सीधे पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक करोड़ कार्यकर्ताओं की पार्टी है जहां अवसर का चक्र घूमता रहता है। उन्होंने सवाल किया क्या यह संभव है कि हमेशा वही गिने-चुने लोग ही हर बार पद पर बने रहें?

​पारिवारिक नहीं, कार्यकर्ताओं की पार्टी है जेडीयू

​जेडीयू की कार्यशैली पर जोर देते हुए साकेत सिंह ने इसे राजद और कांग्रेस जैसी परिवार आधारित पार्टियों से अलग बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू सुशासन, अनुशासन और संयम की राजनीति करती है। यहां किसी परिवार विशेष को नहीं बल्कि योग्य और कर्मठ कार्यकर्ताओं को संगठन में जिम्मेदारी दी जाती है।

​नई टीम और संगठन का विस्तार

​उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने नई प्रदेश कमिटी की घोषणा की थी। इस नई टीम में 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव, 74 सचिव, 9 प्रवक्ता और एक कोषाध्यक्ष को शामिल किया गया है। विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को पुनः मुख्य प्रवक्ता और ललन सर्राफ को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी का मानना है कि यह पुनर्गठन राज्य में संगठन की सक्रियता बढ़ाने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक रणनीतिक कदम है।