Bihar news: आगामी समय में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं, इसी कड़ी में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने भी पंजाब में अकेले दम पर चुनावी मैदान में उतरने का बड़ा निर्णय लिया है।

​पंजाब में जदयू का मास्टर प्लान

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से जदयू 45 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन सीटों पर गहन मंथन कर रहा है। राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की हालिया बैठक में भी पांच राज्यों के चुनावों को लेकर व्यापक चर्चा हुई है। यद्यपि बिहार के पार्टी नेताओं की ओर से अभी इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है लेकिन पार्टी की जमीनी सक्रियता संकेत दे रही है कि पंजाब में जदयू एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने का प्रयास करेगी।

​ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव

​पंजाब और बिहार का संबंध दशकों पुराना और गहरा है। सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मस्थली पटना साहिब होने के कारण पंजाब के लोगों का बिहार के प्रति एक विशेष भावनात्मक जुड़ाव है। विशेषकर, पटना साहिब में आयोजित गुरु गोविंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के भव्य और अभूतपूर्व आयोजन ने पूरे विश्व में बिहार की साख बढ़ाई। इस कार्यक्रम के कुशल आयोजन के बाद से पंजाब के सिखों का बिहार के प्रति नज़रिया पूरी तरह बदल गया है।

​नीतीश कुमार का नेतृत्व और सामाजिक समीकरण

​पंजाब में निवासरत सिखों और वहां की जनता में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति गहरी श्रद्धा और विश्वास का भाव है। पार्टी इसी विश्वास को आधार बनाकर चुनावी नैय्या पार लगाने की उम्मीद कर रही है।
​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब की कृषि और उद्योग जगत में बिहार के लोगों का बड़ा योगदान है। राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक वहां काम कर रहे बिहारियों पर निर्भर है। जदयू इसी ‘बिहार कनेक्शन’ को अपनी बड़ी ताकत मान रही है। पार्टी को विश्वास है कि अपने इसी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के दम पर वे पंजाब की 45 सीटों पर जीत का परचम लहरा सकते हैं। आगामी दिनों में पार्टी की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा और चुनाव प्रचार की दिशा तय होने के बाद ही पंजाब की राजनीति का असली समीकरण स्पष्ट हो पाएगा।