जीवन में आपकी प्रतिभा, परिश्रम और सफलता को सुकून और प्रोत्साहन तब ही मिल पाता है जब उस श्रम को पहचान मिले. किसी की मेहनत को सराहना एक बड़ी मानवीय खूबी है. किसी के बेहतर को बेहतरीन कहना ईश्वरीय गुण है. किसी की उत्कट प्रशंसा, न्याय, कृतज्ञता और सकारात्मक सोच की पहली निशानी है.“Give credit where credit is due.” अंग्रेज़ी के इस मुहावरे का संकेत है जिसने जितना योगदान दिया है उसे उतना श्रेय मिलना ही चाहिए.

चमचमाती सफलता के पीछे ओझल हुए संघर्ष, समर्पण और निरंतर प्रयास को देख लेने वाला वस्तुतः दृष्टा होता है. दूसरों की सफलता कभी भी हमारे लिए ईर्ष्या की नहीं बल्कि अपने भीतर के ईश्वरत्व को पोषित करने वाली वस्तु होनी चाहिए. किसी के संघर्ष और उसकी सफलता की मुक्त कंठ प्रशंसा करके देखिए आप ऐसा महसूस करेंगे जैसे उसके परिश्रम के पुण्य का कुछ अंश आपने अपने भाग्य के साथ जोड़ लिया हो जैसे किसी मातहत की मेहनत, विद्यार्थी की लगन, कलाकार की साधना या साथी के सहयोग की आत्मा खोल कर प्रशंसा क़रें. इससे उसके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा मिलेगी और आपके जीवन को मिलेगा एक नया उजाला. सच्ची प्रशंसा अहंकार नहीं मनोबल देती है, इसलिए किसी को श्रेय देने और किसी का गुणगान करने में बौने ना बनिए, दूसरों को उठाइए आपका क़द और व्यक्तित्व स्वमेव हज़ार गुना हो जाएगा. प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर सहयोग की संस्कृति बनाने के लिए दूसरों की उपलब्धियों को स्वीकार करना सीखना ही होगा. कार्यस्थल हो, परिवार हो , समाज हो या मित्रता जहां भी आप योगदान की कद्र करेंगे वहाँ आप रिश्तों में विश्वास और वातावरण में सकारात्मकता बढ़ाएंगे. एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित है.
गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति, ते निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः।
सुस्वादुतोयाः प्रभवन्ति नद्यः, समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेयाः॥
इसका अर्थ है गुणवान या समझदार लोगों के पास रहने पर ही गुण ‘गुण’ बने रहते हैं. वही गुण जब किसी बुरे या अदूरदर्शी व्यक्ति को प्राप्त होते हैं तो दोष बन जाता है. ठीक वैसे ही जैसे नदियां अपने उद्गम पर मीठा और स्वादिष्ट जल लेकर निकलती हैं लेकिन समुद्र में मिलकर वही पानी पीने योग्य नहींं रहता. संदेश यही है कि ऐसा व्यक्तित्व बनिए कि गुण आपसे होकर भी गुजरे तो भी वह गुण ही रहे. गुणों की पहचान भी गुणी व्यक्ति ही कर सकता है. योग्य व्यक्ति के गुणों को पहचानना अपने आप में एक गुण है. मगर याद रहे प्रशंसा वही सार्थक है जो ईमानदार हो केवल खुश करने के लिए कही गई झूठी तारीफ चाटुकारिता है. वह अपना प्रभाव खो देती है. इस बात के लिए सजग और चैतन्य रहें कि जब और जहां किसी ने कुछ अच्छा किया है, वहां चुप न रहें. उसके प्रयास को पहचानिए, उसके योगदान को स्वीकारिए और जितना बन पड़े उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा कीजिए. दिल खोल कर कहिए “आप बेहतर नहींं, बेहतरीन हैं.” क्योंकि सही व्यक्ति को सही समय पर मिला श्रेय उसकी अगली सफलता की एक मजबूत नींव होती है.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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