रांची। झारखंड में खनिजों पर सेस लगाने के अधिकार को लेकर राज्य सरकार अब आर-पार की कानूनी लड़ाई की तैयारी में है। महाधिवक्ता की राय मिलने के बाद सरकार ने फिलहाल खनिजों पर सेस की वसूली जारी रखने का फैसला किया है। साथ ही केंद्र के कानून से राज्य के अधिकार प्रभावित होते हैं या नहीं, इसे स्पष्ट कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
महाधिवक्ता ने दी सेस वसूली जारी रखने की राय
राज्य के महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने सरकार को दिए कानूनी परामर्श में कहा है कि केंद्र के कानून के लागू होने मात्र से झारखंड के सेस लगाने के अधिकार खत्म नहीं हो जाते। उन्होंने राज्य सरकार को सेस की वसूली जारी रखने और सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने की सलाह दी है।इसके बाद सरकार ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
MMDR Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में उठेगा सवाल
राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्ट कराना चाहती है कि माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट यानी MMDR Act के प्रावधानों से झारखंड के सेस संबंधी कानून का अधिकार समाप्त होता है या नहीं।
सरकार का तर्क है कि यदि केंद्रीय कानून से राज्य का अधिकार खत्म नहीं होता है, तो खनिजों पर सेस की वसूली जारी रखने का रास्ता साफ रहेगा। विधि विशेषज्ञों ने भी इस मामले में जल्द सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी है।
करीब 14 हजार करोड़ के राजस्व का मामला
खनिजों पर सेस को लेकर चल रहे विवाद का सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ रहा है। झारखंड को करीब 14 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया गया है। यही वजह है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से केंद्र के सामने उठा रही है।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर इस मामले में पहले ही विभिन्न स्तरों पर पत्राचार कर चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस कानून को लागू किए जाने का विरोध किया है।
केंद्र और राज्य के अधिकारों पर बड़ा कानूनी सवाल
अब पूरा मामला इस बात पर टिक गया है कि खनिजों पर सेस लगाने के राज्य के अधिकार और केंद्रीय कानून के प्रावधानों के बीच कानूनी स्थिति क्या है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से झारखंड के लिए खनिज राजस्व और सेस वसूली की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।



