रांची। झारखंड पुलिस के अवर निरीक्षकों यानी दारोगाओं की प्रोन्नति और वरीयता सूची से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार को राहत नहीं दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने प्रोन्नति प्रक्रिया पर 13 मई 2026 को लगाई गई रोक हटाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से भी मना किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को होगी।

2017 की दारोगा बहाली से शुरू हुआ विवाद

मामले की जड़ वर्ष 2017 की दारोगा बहाली प्रक्रिया में है। उस समय दो अलग-अलग विज्ञापनों के जरिए नियुक्तियां की गई थीं।विज्ञापन संख्या 05/2017 के तहत सीधी भर्ती हुई थी, जबकि विज्ञापन संख्या 09/2017 के तहत सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से दारोगाओं की नियुक्ति की गई थी।

बाद में पुलिस विभाग ने दोनों श्रेणियों के दारोगाओं की वरीयता सूची तैयार की। इसी सूची में क्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

सीधी भर्ती वाले दारोगाओं ने उठाया वरीयता का मुद्दा

याचिकाकर्ता उत्तम तिवारी एवं अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत में पक्ष रखा।प्रार्थियों की मुख्य दलील है कि सीधी भर्ती का विज्ञापन पहले जारी हुआ था, इसलिए सीधे नियुक्त किए गए दारोगाओं को वरीयता सूची में विभागीय परीक्षा के जरिए नियुक्त दारोगाओं से ऊपर रखा जाना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि विभाग ने इसके विपरीत सीमित विभागीय परीक्षा से नियुक्त दारोगाओं को वरीयता सूची में आगे स्थान दिया, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

प्रोन्नति प्रक्रिया पर फिलहाल जारी रहेगी रोक

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार की ओर से 13 मई 2026 को लगाई गई रोक हटाने के आग्रह को फिलहाल स्वीकार नहीं किया।

इसका सीधा असर दारोगाओं की प्रोन्नति प्रक्रिया पर पड़ रहा है। अब मामले में अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी, जिस पर इस पूरे वरीयता और प्रोन्नति विवाद की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।