सुप्रिया पाण्डेय, रायपुर। झीरम घाटी हत्याकांड मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बुधवार को सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। 13 साल पुराने इस मामले में अदालत ने 5 सितंबर को सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 16 सितंबर को सजा का ऐलान किया है। वहीं अदालत के फैसले के बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ दीपक बैज और घटना के गवाह शिव सिंह ठाकुर ने प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए हैं।

इस जनसंहार को जिन्होंने अंजाम दिया, वे बाहर घूम रहे : भूपेश बघेल

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, झीरम राजनीतिक जनसंहार के मामले में नक्सलियों के पैदल पियादों को दी गई सजा न अनुपातिक है और न इसे न्याय कहा जा सकता है। जिन्होंने षड्यंत्र रचा और जिन्होंने इस जनसंहार को अंजाम दिया, वे तो अभी भी बाहर खुले घूम रहे हैं। नक्सलियों के बड़े नेताओं का नाम, पता नहीं किसके इशारे पर, NIA ने पहले ही हटा दिए थे। उन पर तो आरोप भी नहीं लगाया गया। न NIA ने षड्यंत्र की जांच की, न जांच आयोग ने इसकी जांच की। भाजपा के नेता लगातार अड़ंगा अटकाते रहे और जांच नहीं होने दी। अदालत के फैसले से हमारी सोच बदलने का प्रश्न ही नहीं है। हम अब भी मानते हैं कि न्याय अधूरा है, क्योंकि जांच अधूरी है।

बड़े नक्सलियों को कब मिलेगी सजा- दीपक बैज

PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है, लेकिन ये 10 लोग कौन हैं? उन्होंने ने दावा किया कि ये वो छोटे नक्सली हैं, जो बड़े नक्सलियों का झोला उठाते थे, राशन इकट्ठा करते थे और पानी पिलाने का काम करते थे, इन्हें सजा दी गई है। बड़े नक्सली सरकार की गोद और उनके संरक्षण में हैं, उन्हें सजा कब मिलेगी? फैसला आया है, लेकिन न्याय नहीं मिला, असली न्याय तब मिलेगा, जब सरकार के षड्यंत्रकारियों को फांसी की सजा होगी।

बैज ने कहा कि सरकार बड़े नक्सलियों को बचाने का काम कर रही है, ताकि उनके षड्यंत्र का पर्दाफाश न हो सके, गांवों के छोटे नक्सलियों को सजा देने का काम किया गया है। इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने की क्षमता इन छोटे नक्सलियों में नहीं थी, जिन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए, उन्हें सजा हुई है, जबकि बड़े नक्सली सरकार के संरक्षण में हैं। झीरम घाटी मामले में फैसला तो आया है, लेकिन न्याय अभी तक नहीं मिला है।

गवाह ने जताया असंतोष

झीरम घाटी माओवादी हमले में बचे और गवाह शिव सिंह ठाकुर ने एनआईए की विशेष अदालत के फैसले पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है। जांच के दौरान प्रभावित लोगों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए। घटना के वक्त 400 से ज्यादा नक्सली थे। जिन नक्सलियों के नाम केस डायरी में दर्ज हैं, उनसे पूछताछ भी नहीं हुई। कांग्रेस के नेताओं को नाम पूछकर गोली मारी गई, ये सब किसके कहने पर हुआ? हम पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है। जांच के दौरान प्रभावित लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए। जिन्हें सजा मिली, वो बड़े नक्सलियों के झोला उठाने वाले, खाना बनाने वाले छोटे नक्सली थे।

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