कुंदन कुमार/ पटना​। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पटना में एक प्रेस वार्ता के दौरान विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने भोजपुर मामले में पुलिस की भूमिका, चिराग पासवान की सक्रियता और राज्य की कानून-व्यवस्था पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

​पुलिस कार्रवाई और न्यायिक जांच

​भोजपुर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मांझी ने पुलिस की कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आत्मरक्षा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सही कदम उठाया। मांझी ने तर्क दिया कि यदि पुलिस जवाबी कार्रवाई न करती तो खुद पुलिसकर्मी ही हताहत हो सकते थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ने जान लेने के उद्देश्य से नहीं बल्कि स्थिति को संभालने के लिए कमर के नीचे गोली चलाई। वर्तमान में न्यायिक जांच चल रही है इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी पर FIR दर्ज होना और दोषी साबित होना दो अलग बातें हैं। जांच के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाना चाहिए।

​चिराग पासवान और आरोपों पर टिप्पणी

​केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के भोजपुर दौरे और परिजनों से मुलाकात के सवाल पर मांझी ने कहा कि हर किसी का अपना कार्यक्षेत्र और नजरिया होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति निर्दोष था तो उस पर अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला क्यों दर्ज हुआ? साथ ही उन्होंने घटना के दौरान दिखाए गए रिवॉल्वर की वैधता पर भी प्रश्न चिह्न खड़ा किया।

​शासन और महापंचायत का मुद्दा

​महापंचायत के आयोजन और उसमें अपनी अनुपस्थिति को लेकर मांझी ने कहा कि बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। कुछ निहित स्वार्थी तत्व इस शांति को भंग करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि वे महापंचायत में जाते तो भारी भीड़ जुटना निश्चित था जिससे अव्यवस्था फैलने की आशंका थी। राज्य में शांति बनाए रखने और सरकार के कामकाज में कोई बाधा न आए इसी उद्देश्य से उन्होंने महापंचायत में जाने का निर्णय टाल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में कानून का राज सर्वोपरि है और सरकार विकास की दिशा में बेहतर काम कर रही है।