प्रमोद कुमार, कैमूर। जिले में अंधविश्वास के चलते एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझ गया। सर्पदंश (सांप काटने) जैसी गंभीर और आपातकालीन स्थिति में अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़फूंक का सहारा लेना एक 9 वर्षीय मासूम की जान पर भारी पड़ गया, जबकि उसका छोटा भाई जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
घटना का विवरण: छत पर सोते वक्त हुई अनहोनी
यह दर्दनाक मामला कैमूर जिले के कुदरा थाना क्षेत्र अंतर्गत अजगरा गांव का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सत्येंद्र बैठा के दो बेटे 9 वर्षीय धर्मवीर और 6 वर्षीय धर्मराज रात को अपने घर की छत पर चैन की नींद सो रहे थे। इसी दौरान किसी जहरीले सांप ने दोनों भाइयों को डंस लिया।
अस्पताल के बजाय ओझा के पास पहुंचे परिजन
सांप के काटने के बाद समय रहते बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की बहुत आवश्यकता थी परंतु परिवार और परिजन अंधविश्वास के दलदल में फंस गए। वे तुरंत इलाज कराने के बजाय दोनों मासूमों को पास के ही कर्मा गांव में एक ओझा के पास झाड़फूंक कराने के लिए ले गए। घंटों तक अंधविश्वास का यह खेल चलता रहा। जब झाड़फूंक के दौरान बड़े भाई धर्मवीर की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और उसकी हालत गंभीर हो गई तब होश आया और उन्हें मोहनियां अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया।
बड़े भाई की मौत, छोटे की हालत नाजुक
मोहनिया अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बड़े भाई धर्मवीर को मृत घोषित कर दिया। वहीं, छोटे भाई धर्मराज की अचेत और गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे भभुआ सदर अस्पताल भेजा गया जहां से उसकी नाज़ुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए वाराणसी (बनारस) रेफर कर दिया गया है। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
मजदूरी करने वाले पिता की गुहार और ग्रामीणों का दर्द
घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। ग्रामीण महेंद्र कुमार ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि अगर समय रहते दोनों बच्चों को अस्पताल ले जाया जाता तो यह अनहोनी टल सकती थी। बच्चों के पिता सत्येंद्र बैठा जो मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा चलाते हैं इस हादसे से पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से आर्थिक मुआवजे की गुहार लगाई है।
विज्ञान के युग में भी अंधविश्वास का काला साया
आज का दौर विज्ञान और तकनीक का युग है जहां चिकित्सा विज्ञान ने हर बीमारी और जहर का पुख्ता इलाज ढूंढ लिया है। देश के हर सरकारी अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम (सर्पदंश का टीका) मुफ्त में उपलब्ध होता है। इसके बावजूद समाज में आज भी ओझा-गुणी और झाड़फूंक जैसी कुप्रथाएं जीवित हैं। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में भूलकर भी अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें बल्कि तुरंत नजदीकी अस्पताल का रुख करें ताकि किसी की अनमोल जान बचाई जा सके।


