प्रमोद कुमार/कैमूर। जिले में जिला परिषद कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार के आरोपों और आपसी खींचतान के कारण सुर्खियों में है। रामगढ़ के पूर्व विधायक अशोक सिंह द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाने में लाखों रुपये के गबन की शिकायत जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह से किए जाने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर आरोप पर कार्रवाई करते हुए डीएम ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है।

​क्या है पूरा मामला?

​पूर्व विधायक अशोक सिंह ने आरोप लगाया है कि रामगढ़ क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर बड़ी धांधली हुई है और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। फोन पर मिली इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि इस मामले के सामने आते ही जिला परिषद की राजनीति में उबाल आ गया है।

​जिला अध्यक्ष का पक्ष

​जिला परिषद की अध्यक्ष रिंकी सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि हमने स्ट्रीट लाइट नहीं बल्कि हाई मास्क लाइट लगवाई है। हम जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में कैमूर जिला परिषद ने विकास कार्यों में पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि कैमूर में जो विकास कार्य हुए हैं वे राज्य के किसी अन्य जिले के लिए मिसाल हैं।

​सदस्यों ने मांगी जांच और तत्काल बैठक

​दूसरी ओर जिला परिषद सदस्य विकास उर्फ लल्लू पटेल ने सात अन्य सदस्यों के साथ लामबंद होकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला भर की अन्य विकास योजनाओं में कटौती कर सारा पैसा हाई मास्क लाइट में खर्च किया गया है जो एक बड़ा घोटाला है। सदस्यों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिला परिषद की तत्काल बैठक बुलाई जाए।

​आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

​अध्यक्ष रिंकी सिंह ने पलटवार करते हुए विकास उर्फ लल्लू पटेल पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लल्लू पटेल महिलाओं का सम्मान नहीं करते और कुछ सदस्यों को बरगलाकर गलत राजनीति कर रहे हैं। अध्यक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा वे जबरन फंड की मांग करते हैं। बेहतर होगा कि उनके क्षेत्र की 14.5 लाख रुपये की बहा खोदाई योजना की भी निष्पक्ष जांच की जाए।
​फिलहाल कैमूर जिला परिषद का यह मामला प्रशासनिक जांच की दहलीज पर है। अब सबकी निगाहें तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि किसके दावों में सच्चाई है और किस स्तर पर सरकारी राशि का खेल हुआ है।