कैथल, राकेश कथूरिया. कैथल इस्कॉन प्रचार समिति, कैथल के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास श्रीमन साक्षी गोपाल दास जी ने बताया कि भगवान स्वयं अर्जुन को कह रहे हैं कि मेरा जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य हैं। जो मेरे जन्म और मेरे कर्मों को तत्व से जान लेता है वह अपने वर्तमान शरीर का त्याग करके भौतिक संसार में दोबारा नहीं आता। वह मेरे धाम को प्राप्त के लेता है।
अर्जुन के पूछने पर श्री भगवान बोले कि मेरे धाम में प्रकाश करने के लिए ना तो सूर्य की जरूरत होती है और ना ही चंद्रमा की, ना अग्नि की। और एक बार मेरे बैकुंठ लोक में आने वाली आत्मा दोबारा इस भौतिक जगत में नहीं आती। जो भगवान की भक्ति में लग जाते हैं वे भगवान को संपूर्ण 6 ऐश्वर्य से युक्त भगवान मानते हैं। पराशर मुनि के द्वारा भगवान की परिभाषा है कि “तीनों लोकों में सबसे ज्यादा सुन्दर, शक्तिवान, प्रसिद्धि, धनवान, ज्ञानी, वैरागी – ये 6 ऐश्वर्य पूर्ण रूप से विद्यमान होते हैं वे भगवान होते हैं।
श्री कृष्ण ही स्वयंभू भगवान है इनसे बढ़कर भी कोई नहीं है और उनके बराबर भी कोई नहीं है।” कृष्ण कथा की महिमा बताते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे गंगा जी देवलोक, पृथ्वी लोक और पाताल लोक तीनों को पवित्र करती है उसी प्रकार श्री कृष्ण कथा भी कथा सुनने वाले को, कथा का आयोजन करने वाले को और कथा में आने वालों को सभी को पवित्र बना देती है।शुकदेव गोस्वामी को मौन देखकर परीक्षित महाराज की आंखों से झर झर आंसू बहने लगे। आप मुझे मेरे इष्ट भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को सुनने की कृपा करें। संपूर्ण सृष्टि के राजा महाराज परीक्षित इस भागवत कथा को सुनने के लिए अपने गुरुदेव से किस तरह भीख मांग रहे हैं। विलाप कर रहे हैं। मुझे मृत्यु की भी परवाह नहीं है। मुझे केवल आपके मुख से कृष्ण कथा सुननी है।
यह कहते हुए जब परीक्षित महाराज रोने लगे तो श्रील शुकदेव गोस्वामी का हृदय पिघल गया। तब वह बोले की हे राजन! इतिहास में मैंने बहुत से राजा देखे हैं, उनके बारे में सुना है। उनमें से कुछ राजऋषि हुए हैं, कुछ उनसे भी श्रेष्ठ राजऋषितर हुए हैं लेकिन पुरे विश्व के महान संत-महात्मा के बीच मैं यह घोषणा करता हूँ कि हे राजन! आज तक तुम्हारे जैसा राजऋषि सत्म नहीं हुआ। हे राजन! अब मैं तुम्हें भगवान श्री कृष्ण की जन्म की लीला सुनाने जा रहा हूं। 4 दिन और 4 रात से तुम बिना कुछ खाए पिए निरंतर कथा श्रवण कर रहे हो। आप कुछ जल-पान करलो फिर इस कथा को शुरू करता हूँ।
लेकिन महाराज परीक्षित ने हाथ जोड़ते हुए कहा कि ना मुझे कुछ खाना है ना ही कुछ पीना है। गुरुदेव मैं सत्य कह रहा हूँ कि आपके श्री मुख से निकली हुई अभी तक कथा सुनकर ना तो मुझे भूख लगी है और ना ही प्यास लगी है। आप मुझ पर कृपा कर मुझे श्री कृष्ण कथा सुनाइए। पहले ही प्यास के कारण मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। मुझसे अपराध हुआ, मुझे श्राप मिल गया और आज मैं उसका भुगतान कर रहा हूं।
तब श्रील शुकदेव गोस्वामी ने महाराज परीक्षित को विस्तार पूर्वक भगवान श्री कृष्ण के जन्म की लीलाओं का वर्णन करते हुए कथा सुनाई।प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा के पंचम दिवस पर हर वर्ष की भांति “भगवान श्री कृष्ण की जन्माष्टमी महोत्सव” को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया गया। कथा के पंडाल को फूलों, गुबारों तथा खिलौनों से सजाया गया। जन्मोत्सव के समय भगवान कृष्ण को नन्द बाबा बने भक्त अपने शीश पर टोकरी में ले कर आये। सभी भक्तों ने उस सुन्दर झाकी का दर्शन किया। सभी भक्त भगवान के लिए भोग लेकर आए। गत वर्षों की भांति मटकी सजावट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया और उन सभी में से सबसे सुन्दर 11 मटकिया निकाली गई और उन्हें सजाने वालों को प्रभु जी ने अपने हाथ से प्रसाद व आशीर्वाद दे कर सम्मानित किया गया।
प्रेस सचिव ने बताया कि कृष्ण कथा में चल रहे प्रसंग बहुत ही मार्मिक है। क्योंकि हर बार कृष्ण कथा को सुनकर एक अलग ही रोमांच उत्पन्न होता है। समिति के सभी मैम्बर्स और श्रोतागण बहुत ध्यान से कथा का श्रवण कर रहे हैं।
- हरियाणा के इस आईपीएस अधिकारी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने नए डीजी
- रथयात्रा में मनमाने ढंग से नहीं बंटेंगे कॉर्डन पास, सीएम माझी का कलेक्टर को सख्त निर्देश
- एक लापरवाही और चली गई जान: उफनती नदी में बहे दो बाइक सवार, पुलिस ने दोनों के शव किए बरामद
- हरियाणा साइबर अपराध पर सख्त: ठगी के 31% पैसे लौटाए, 6 महीने में 3,947 साइबर अपराधी गिरफ्तार
- केएस ऑयल्स में ₹75 करोड़ का बड़ा घोटाला: तेल टैंकों में मिला 90% पानी, चेयरमैन रमेश गर्ग सहित 12 पर CBI की FIR

