करनाल: हरियाणा बिजली वितरण निगम के निलंबित सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर गीतू राम तंवर की मौत के बाद करनाल में मामला तूल पकड़ गया है। रिटायरमेंट के दिन संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले तंवर के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। परिवार की मांग है कि सुसाइड नोट में जिन 12 अधिकारियों के नाम दर्ज हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की जाए। परिजनों का कहना है कि जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलता, वे शव को अंतिम विदाई नहीं देंगे।
गीतू राम तंवर सोमवार सुबह अपनी कार से घर से निकले थे। कुछ देर बाद उन्होंने अपनी बेटी को फोन किया। परिजनों के मुताबिक बातचीत के दौरान उन्होंने बेटी से कहा कि वह अपनी ‘आखिरी चिट्ठी’ देने जा रहे हैं। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। काफी देर तक संपर्क नहीं होने पर परिवार ने उनकी तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान तंवर का शव डीएवी स्कूल के नजदीक खड़ी कार से बरामद हुआ। उनके मुंह से झाग निकल रहा था। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि उन्होंने जहरीला पदार्थ निगलकर जान दी। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
चार पन्नों के नोट में अधिकारियों पर गंभीर आरोप
पुलिस को कार से चार पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है। बताया जा रहा है कि इसमें एक IAS अधिकारी समेत कई XEN, SDO और अन्य विभागीय कर्मचारियों के नाम लिखे गए हैं। नोट में तंवर ने विभाग में मानसिक प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव किए जाने के आरोप लगाए हैं।
बताया जा रहा है कि करीब पांच महीने पहले एक एडिटेड वीडियो के वायरल होने के मामले में बिजली निगम ने तंवर को निलंबित कर दिया था। परिजनों के अनुसार, तंवर का आरोप था कि उन्हें इस मामले में साजिश के तहत फंसाया गया और निष्पक्ष जांच किए बिना कार्रवाई की गई।
पत्नी के लिए छोड़ा भावुक संदेश
सुसाइड नोट के अंतिम हिस्से में तंवर ने अपनी पत्नी को संबोधित करते हुए कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही। उन्होंने संविधान के दायरे में रहकर कार्रवाई करने और हिम्मत बनाए रखने का संदेश दिया। साथ ही वीडियो को तैयार कर वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए।
मौत की सूचना के बाद परिवार में मातम के साथ आक्रोश भी फैल गया। मृतक के भाई और बेटियों समेत अन्य परिजन 12 नामजद अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी और आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक वे शव स्वीकार नहीं करेंगे और अंतिम संस्कार भी नहीं किया जाएगा।
करनाल पुलिस ने सुसाइड नोट को अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों की ओर से मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से करने और परिजनों को उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाने की बात कही जा रही है।
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