करनाल में बुधवार को स्वनिधि महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें पथ विक्रेताओं को सरकारी ऋण और अन्य योजनाओं का लाभ देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की जांच की गई।
सुमन चौहान, करनाल। नगर निगम कार्यालय में बुधवार को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत ‘स्वनिधि महोत्सव-लोक कल्याण मेला’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 54 पथ विक्रेताओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी सुनिश्चित की। उप निगम आयुक्त विनोद नेहरा ने बताया कि इस विशेष मेले का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद पथ विक्रेताओं तक पहुंचाना है। इस दौरान अधिकारियों ने विक्रेताओं को स्वनिधि योजना की प्रक्रियाओं और इससे मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। यह पहल पथ विक्रेताओं के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और सार्थक कदम साबित हो रही है।

पथ विक्रेताओं को मिले ऋण अवसर
कार्यक्रम के दौरान 12 पात्र पथ विक्रेताओं को लेटर ऑफ रिकमेंडेशन (एल.ओ.आर.) प्रदान किए गए, जिससे वे अब प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही, 2 अन्य योग्य विक्रेताओं को क्रेडिट कार्ड भी जारी किए गए। नगर निगम ने सभी विक्रेताओं की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग की शुरुआत की है ताकि उनकी पारिवारिक व आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके। इस डेटा के आधार पर उन्हें ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, जननी सुरक्षा योजना और बीमा योजनाओं जैसी विभिन्न सरकारी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। उप निगम आयुक्त ने दोहराया कि नगर निगम भविष्य में भी ऐसे शिविर निरंतर आयोजित करता रहेगा।

स्वास्थ्य शिविर में हुई विशेष जांच
नगर निगम के विशेष आग्रह पर सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा कार्यालय परिसर में एक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पथ विक्रेताओं और आम नागरिकों के बी.पी. और शुगर की जांच की। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मधुमेह (डायबिटीज) के प्रति लोगों को जागरूक किया और संतुलित आहार व नियमित व्यायाम अपनाने की सलाह दी। जिन लोगों में मधुमेह के लक्षण पाए गए, उन्हें उच्च स्तरीय उपचार के लिए सिविल अस्पताल में रेफर किया गया। यह शिविर न केवल आर्थिक सशक्तिकरण, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने में भी अत्यंत सफल रहा, जिससे विक्रेताओं को समय रहते अपनी बीमारियों की पहचान करने में मदद मिली।

