तमिलनाडु के चर्चित करूर भगदड़ मामले में मुख्यमंत्री विजय थलापति की सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विपक्षी दल डीएमके की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली है। अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी।
डीएमके के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी आर.एस. भारती ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर मंत्री आधव अर्जुन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और करूर भगदड़ मामले पर टीवीके नेताओं एवं मंत्रियों के सार्वजनिक बयान देने पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि यह रोक तब तक लागू रहे, जब तक कोर्ट की निगरानी में चल रही सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती।
क्या है करूर भगदड़ मामला?
यह मामला 27 सितंबर 2025 को करूर में आयोजित टीवीके की रैली के दौरान हुई दर्दनाक भगदड़ से जुड़ा है। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 142 लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
मंत्री आधव अर्जुन के बयान पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2 जुलाई को दिए गए एक सार्वजनिक भाषण में मंत्री आधव अर्जुन ने कहा था कि “हिसाब बराबर करना है” और करूर त्रासदी के लिए पिछली डीएमके सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। डीएमके का दावा है कि एक आरोपी मंत्री का इस तरह का बयान कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है और जनता के बीच गलत धारणा बनाने का प्रयास है।
पीड़ित परिवारों से संपर्क पर भी आपत्ति
याचिका में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री विजय थलापति के करूर जाकर पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता देने की संभावित योजना पर भी सावधानी बरती जानी चाहिए। डीएमके ने स्पष्ट किया कि उसे पीड़ितों के कल्याणकारी उपायों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चूंकि पीड़ित परिवार सीबीआई जांच के महत्वपूर्ण गवाह हैं, इसलिए मामले से जुड़े राजनीतिक पदाधिकारियों का उनसे सीधा संपर्क जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
पहले भी जता चुका है सुप्रीम कोर्ट चिंता
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान जांच प्रक्रिया और मद्रास हाई कोर्ट में हुई कार्यवाही पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। अब मंगलवार की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इससे करूर भगदड़ मामले की जांच और तमिलनाडु की राजनीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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