अनूप दुबे, Katani. मध्य प्रदेश में ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ और ‘नौनिहालों का भविष्य संवारने’ के सरकारी दावों की कटनी जिले में सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। ढीमरखेड़ा तहसील के दूरस्थ ग्राम ऊमरपानी से एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने बारिश के मौसम में स्कूल शिक्षा विभाग की चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के दावों की पोल खोलकर रख दी है। यहां के माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि मासूम बच्चे हर रोज डर के साए में ककहरा सीखने को मजबूर हैं।

ये भी पढ़ें: अन्नदाताओं से धोखाधड़ी: 6 गांवों के 31 किसानों से 80 लाख की ठगी, खाली खाते का चेक थमाकर फरार हुए व्यापारी

प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि हादसे के इसी खौफ के चलते स्कूल के 96 दर्ज बच्चों में से 50 से ज्यादा बच्चों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया है।

2 कमरों में पहली से आठवीं की क्लास, पिछले साल फैला था करंट

ऊमरपानी के इस स्कूल में अव्यवस्थाओं और लापरवाही की हदें पार हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुराने भवनों को तोड़ तो दिया गया लेकिन नए कमरों का अता-पता नहीं है। नतीजा यह है कि महज दो कमरों में पहली से लेकर आठवीं तक की कक्षाएं जैसे-तैसे संचालित की जा रही हैं।

यह लापरवाही नई नहीं है। पिछले साल इसी स्कूल परिसर में करंट फैल गया था, जिससे मासूमों की जान पर बन आई थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस जर्जर भवन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

न बाउंड्री, न गेट… आवारा मवेशियों का तबेला बना स्कूल

भवन जर्जर होने के साथ-साथ इस स्कूल की बुनियादी कड़ियां भी पूरी तरह टूट चुकी हैं। स्कूल में न तो बाउंड्री वॉल है और न ही मुख्य गेट। बाउंड्री न होने की वजह से स्कूल परिसर में दिनभर आवारा जानवर घूमते रहते हैं और गंदगी फैलाते हैं।

स्कूल के प्रसाधन की हालत भी पूरी तरह खस्ताहाल है, जिससे खासकर छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ये भी पढ़ें: ये चमत्कार नहीं तो और क्या? महिला के पेट में ‘काल’ के साथ पल रही थी मासूम जिंदगी, ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने देखा कुछ ऐसा कि उड़ गए होश

प्रभारी बोले- अफसरों को बताया, गांव में किराए का मकान भी नहीं

इस पूरी अव्यवस्था पर विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक वचन सिंह ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि जर्जर भवन की पूरी जानकारी विभागीय उच्च अधिकारियों को लिखित में दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे बच्चों को सुरक्षित जगह बैठाना चाहते हैं, लेकिन पूरे गांव में कोई ऐसा किराए का मकान या निजी भवन भी उपलब्ध नहीं है जहां अस्थाई रूप से स्कूल को शिफ्ट किया जा सके।

जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे

प्रशासनिक अनदेखी के कारण अब हालत यह है कि जहां कागजों पर बच्चों की उपस्थिति 96 है, वहीं अमूमन सिर्फ 40 बच्चे ही जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंच रहे हैं। बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या कटनी का शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहा है?

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m