इदरीश मोहम्मद, पन्ना। बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक और अन्य महा-परियोजनाओं के कारण विस्थापन का दंश झेल रहे आदिवासियों और किसानों का ‘चिता आंदोलन’ रविवार को तीसरे दिन भी उग्रता के साथ जारी रहा। छतरपुर और पन्ना जिलों के भूमिपुत्रों ने प्रशासन पर संगीन भ्रष्टाचार, ग्राम सभाओं की अनदेखी और तानाशाही तरीके से बेदखली करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन छिन जाने के बाद उनकी जिंदगी जीती जी चिता समान हो गई है।

 आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने के लिए प्रशासन अमानवीयता पर उतर आया है। आंदोलन स्थल की बिजली काट दी गई है और भीषण गर्मी के बीच राशन, साफ पानी तथा जीवनरक्षक दवाओं की सप्लाई मनमाने ढंग से रोक दी गई है। रिश्वतखोरी और कागजी हेरफेर के खिलाफ विस्थापितों ने अब आर-पार की जंग का एलान कर दिया है।

​आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि इस मानवीय आपदा में भी नेता और अधिकारी भ्रष्टाचार का अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने जल्द ही इस करोड़ों रुपये के घोटाले के दस्तावेजी प्रमाण उजागर करने की बात कही है। इस बीच, आंदोलन को प्रख्यात समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों का चौतरफा जनसमर्थन मिल रहा है, जिससे प्रशासन के खिलाफ विस्थापितों की यह दहाड़ अब पूरे प्रदेश में गूंजने लगी है।

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