इमरान खान, खंडवा। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव पर आयोजित भव्य ‘एकात्म पर्व’ आज से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के सान्निध्य में पांच दिवसीय कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर विधिवत उद्घाटन किया।
ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में आयोजित इस पांच दिवसीय आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मप्र अद्भुत धरती है, हर युग में भगवान का सानिध्य प्राप्त हुआ है। वनवास के समय भगवान राम आए, श्रीराम बनकर दुनिया को रामराज्य के मार्ग पर ले जाने वाला प्रदेश, हमारा अपना मध्यप्रदेश बना। 5 हजार साल पहले कंस को मारने के बाद भगवान श्रीकृष्ण आए, यहां शिक्षा ली और श्रीकृष्ण बने। ओंकारेश्वर का एकात्म धाम जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की ऐतिहासिक उपस्थिति की याद दिलाता है।
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अद्वैत लोक और अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण
आयोजन की शुरुआत मंत्रोच्चार और वैदिक अनुष्ठानों के साथ हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अद्वैत लोक और अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण किया और यज्ञ में आहुतियां भी दीं। यह आयोजन आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की ओर से वैशाख शुक्ल पंचमी के अवसर पर किया जा रहा है। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े समेत कई संत और विद्वान मौजूद रहे।
2195 करोड़ रुपए की स्वीकृति
द्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण भी एकात्म धाम के द्वितीय चरण में किया जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार ने 2195 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। ‘अद्वैतामृतम्’ विमर्श सभा के तहत अद्वैत वेदांत और आधुनिक पीढ़ी यानी Gen-Z के संबंधों पर भी चर्चा शुरू हुई। इसमें संतों और विद्वानों ने युवाओं के दृष्टिकोण से अद्वैत दर्शन की प्रासंगिकता पर विचार रखे। श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज ने भी संबोधित किया।
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पांच दिन तक चलेगा एकात्म पर्व
धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समागम से सजा यह ‘एकात्म पर्व’ अगले पांच दिनों तक ओंकारेश्वर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगा। आयोजन को संबोधित करते हुए शंकराचार्य सदानंद सरस्वती जी ने आत्मा, भगवान और ब्रह्म के विषय में बताते हुए कहा कि ब्रह्म, भगवान और आत्मा तीनों एक ही है। तीनों के समागम से ही संस्कृति का पालन और उसका पारायण होता है। यही आदिगुरु शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत है, जो विश्व को शांति और आध्यात्मिकता की शिक्षा प्रदान करता है।
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