किशनगंज‌। जिले में दो बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है। खुफिया एजेंसी (IB) द्वारा की गई गहन पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिससे सीमा पार के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना बढ़ गई है। इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और भारत-बांग्लादेश सीमा पार कराने वाले दलालों की भूमिका की जांच तेजी से की जा रही है।

​दलाल को दिए थे 15 हजार, असम के रास्ते की अवैध घुसपैठ

​गिरफ्तार आरोपियों में से एक की पहचान मो. हसन शेख उर्फ असनउल्ला मल (32) के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान उसने कबूल किया कि उसने भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के लिए एक दलाल को 15,000 रुपए दिए थे।
​दलाल ने उसे असम के रास्ते भारत-बांग्लादेश की सीमा पार कराई थी, जिसके बाद वह ट्रेन के जरिए किशनगंज पहुंचा। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वह पहले ओमान गया था और वहां से भारत लौटने के बाद वापस बांग्लादेश जाने की फिराक में था। भारत में अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने हसन शेख नाम अपनाया, जबकि बांग्लादेश में उसका वास्तविक नाम असनउल्ला है।

​फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से बनवाए अन्य भारतीय दस्तावेज

​हसन शेख ने अपनी पहचान को कानूनी जामा पहनाने के लिए उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के भैरवा थाना क्षेत्र से एक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया था। इसी जाली प्रमाण पत्र के आधार पर उसने पैन कार्ड और अन्य भारतीय पहचान पत्र बनवाए।
​सुरक्षा एजेंसियों ने उसके पास से कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है। आईबी अब यह पता लगाने में जुटी है कि भारत से वापस बांग्लादेश जाने के दौरान किन स्थानीय संपर्कों और मददगारों का इस्तेमाल होने वाला था।

​महिला आरोपी पहले भी शिलांग में हो चुकी है गिरफ्तार

​इस मामले की दूसरी आरोपी एक महिला है, जिसकी पहचान तय्यबा इस्लाम उर्फ तंजीला अख्तर (करीब 28 वर्ष) के रूप में हुई है। वह बांग्लादेश के नारायणगंज जिले के रूपगंज थाने की रहने वाली है। उसने किशनगंज जिले के महीनगांव (डीलर चौक) निवासी जाकिर हुसैन (24) से शादी की थी और शादी के बाद से वहीं रह रही थी।
​पति जाकिर हुसैन की निशानदेही पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। किशनगंज सदर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया है कि वह लगभग एक साल पहले शिलांग में भी पकड़ी गई थी और जेल जा चुकी है।
​अदालत द्वारा उसका पासपोर्ट सीज करते हुए उसे शिलांग से बाहर न जाने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद उसने अदालत के आदेश की अवहेलना की, जिसके चलते उस पर कानूनी कार्रवाई करते हुए कोर्ट में पेश किया गया है।

​सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर और आगे की जांच

​इस सनसनीखेज खुलासे के बाद स्थानीय पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने का प्रयास कर रही हैं कि सीमावर्ती इलाकों में फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज तैयार करने वाले रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई अन्य बड़े और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।