किशनगंज। जिले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के स्थापना दिवस पर पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विहिप कार्यकर्ताओं ने शहर को स्वच्छ रखने वाले सफाई कर्मियों का सम्मान करने के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर एक विशेष और अनोखा मार्ग चुना। इस आयोजन के दौरान कार्यकर्ताओं ने न केवल सफाई कर्मियों का अभिनंदन किया, बल्कि उनके चरणों को दूध से धोकर उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और सम्मान प्रकट किया।
​कार्यक्रम के दौरान सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सफाई कर्मी सम्मानपूर्वक कुर्सियों पर बैठे हुए हैं और विहिप कार्यकर्ता पूरी श्रद्धा के साथ उनके पैर दूध से धो रहे हैं। पैर धोने के पश्चात कार्यकर्ताओं ने उन्हें मिष्ठान्न खिलाया और अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया। इस भावुक और आदरपूर्ण पल के बाद कार्यकर्ताओं ने सफाई कर्मियों से आशीर्वाद भी प्राप्त किया, जो समाज में आपसी आदर और समरसता का एक सुंदर उदाहरण पेश करता है।

​श्रम के महत्व और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

इस अवसर पर विहिप के कार्यकर्ताओं ने कहा कि सफाई कर्मी हमारे समाज के वे गुमनाम नायक हैं, जो हर दिन शहर को साफ, स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में अपना अहम योगदान देते हैं। जब आम तौर पर लोग अपने घरों, प्रतिष्ठानों और दुकानों से निकलने वाले कचरे तथा गंदगी से दूरी बनाए रखते हैं, तब ये सफाई कर्मी बिना किसी हिचकिचाहट के शहर की गलियों, मोहल्लों और मुख्य सड़कों की साफ-सफाई का कठिन कार्य संभालते हैं।
​कार्यकर्ताओं का यह भी मानना था कि समाज में किसी भी व्यक्ति के श्रम और उसके कार्य को छोटा या कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। शहर को स्वच्छ रखने वाले इन कर्मयोगियों के प्रति समाज के हर वर्ग में सम्मान की सच्ची भावना होनी चाहिए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि श्रम का सम्मान ही सच्ची मानवता है और इन कर्मियों के योगदान को रेखांकित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

​इलाके में बनी चर्चा का विषय

किशनगंज में आयोजित इस सम्मान समारोह की गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है और यह स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच चर्चा का एक प्रमुख विषय बन गया है। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विहिप के कई प्रमुख कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान कुमार साहिल, राकेश कुमार, जयदीप राज, अंकित मिश्रा, पवन दास, मनीष कुमार, सोनू सिंह, छोटू पासवान और निर्मल ठाकुर सहित संगठन के तमाम स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस पूरी पहल ने शहरवासियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि समाज के निर्माण में हर एक व्यक्ति का श्रम कितना मूल्यवान होता है।