अजय सैनी, भिवानी. कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो तो बंदिशें और अभाव कभी रास्ता नहीं रोक सकते। इस कहावत को हूबहू सच कर दिखाया है गांव हेतमपुरा निवासी धावक कुलदीप पुत्र पालाराम ने। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित 14वें नेशनल मास्टर्स गेम्स में कुलदीप ने अपनी रफ्तार का ऐसा जलवा बिखेरा कि हर कोई दंग रह गया।
उन्होंने इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर दौड़ में स्वर्ण पदक और 800 मीटर रेस में रजत पदक जीतकर ना सिर्फ अपने गांव, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। राष्ट्रीय स्तर पर इस बड़ी कामयाबी के बाद गांव हेतमपुरा पहुंचने पर कुलदीप का जोरदार स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित कर अपने इस सुपरहीरो को पलकों पर बिठाया और उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जताई।
कुलदीप की यह सफलता इसलिए सामान्य नहीं है, क्योंकि इसके पीछे उनका कड़ा संघर्ष, दिन-रात की मेहनत और संसाधनों की भारी कमी छुपी है। कुलदीप वर्तमान में भिवानी के पालुवास मोड़ स्थित एक कपड़ा प्लांट में कर्मचारी हैं। घर की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने के लिए वे दिनभर प्लांट में ड्यूटी करते हैं, लेकिन अपने भीतर के खिलाड़ी को उन्होंने कभी मरने नहीं दिया।
ड्यूटी के थका देने वाले शेड्यूल के बावजूद कुलदीप हर रोज सुबह और शाम को बिना नागा किए कड़ा अभ्यास करते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके गांव या आसपास अभ्यास करने के लिए कोई खेल स्टेडियम या सिंथेटिक ट्रैक नहीं है। कुलदीप गांव की टूटी-फूटी सडक़ों और कच्चे रास्तों पर ही दौड़ लगाकर खुद को तराश रहे हैं। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी उनका यह जज्बा युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है। इससे पहले भी कुलदीप कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक अपने नाम कर चुके हैं।
इस मौके पर धावक कुलदीप ने कहा कि धर्मशाला में देश के अलग-अलग राज्यों से बेहतरीन धावक आए थे, लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि मुझे अपने तिरंगे और अपने गांव का मान बढ़ाना है। जब मैं दौड़ता हूं तो मुझे पैरों के नीचे की टूटी सडक़ें याद नहीं रहतीं, मुझे सिर्फ अपनी मंजिल दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि मेरे पास कोई आधुनिक ट्रैक या सुविधाएं नहीं हैं, फिर भी मैंने हार नहीं मानी। लेकिन आगे बढऩे के लिए और देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने के लिए सुविधाओं की जरूरत होती है। मैं सरकार और खेल विभाग से गुहार लगाता हूं कि मुझ जैसे ग्रामीण एथलीटों की मदद की जाए, ताकि हमें सही प्लेटफॉर्म मिल सके।

धावक कुलदीप ने कहा कि मेडल जीतना मेरा शौक और जुनून है, लेकिन मेरा असली सपना भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करना है। मैं चाहता हूं कि देश की सीमाओं पर रहकर भारत माता की रक्षा करू और खेल के मैदान में भी देश का झंडा हमेशा ऊंचा रखूं।
- शुभेंदु सरकार में नए मंत्रियों को विभागों का बंटवारा, स्वप्न दास गुप्ता बने वित्त मंत्री, CM के पास गृह
- Masala Khichdi Balls : बची हुई खिचड़ी से झटपट तैयार करें क्रिस्पी ‘मसाला खिचड़ी बॉल्स’, जानिए आसान रेसिपी
- कुरुक्षेत्र बाईपास प्रोजेक्ट: 29 गांवों की जमीन रजिस्ट्री पर लगी रोक
- सराफा कारोबारी की हत्या कर जेवरात लूटने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पुलिस ने सभी 7 आरोपियों को किया गिरफ्तार, देसी कट्टा, कारतूस और लाखों के आभूषण बरामद
- कोसी नदी में नाव हादसा: चार किसान लापता, सात ने तैरकर बचाई जान, SDRF चला रही सर्च ऑपरेशन

