कुंदन कुमार/लखीसराय। बिहार के लखीसराय जिले में नीट (NEET) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा की शुचिता को तार-तार करने की एक बड़ी साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। लखीसराय पुलिस ने नीट परीक्षा में सॉल्वर गैंग के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऐसे शुरू हुआ खेल और कैसे पकड़े गए आरोपी
घटना की शुरुआत तब हुई जब लखीसराय के एसडीएम शिवम कुमार को गुप्त सूचना मिली कि बाहरी जिलों से कुछ डमी कैंडिडेट लखीसराय पहुंच रहे हैं और वे नीट परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया।
इसी दौरान हसनपुर परीक्षा केंद्र पर एक परीक्षार्थी पर पुलिस को शक हुआ जब वह केंद्र में प्रवेश कर रहा था। कड़ाई से पूछताछ करने पर उस परीक्षार्थी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह असली परीक्षार्थी की जगह परीक्षा में बैठने आया है। बस यहीं से इस बड़े सॉल्वर गैंग की कड़ियां जुड़ती चली गईं और एक-एक करके 24 लोग पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
30 से 40 लाख रुपये की डील और मिलीभगत
पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि डमी कैंडिडेट को बिठाने के लिए 30 से 40 लाख रुपये की मोटी रकम तय की गई थी। इस गैंग की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इसमें केवल पेशेवर अपराधी ही नहीं बल्कि पांच मेडिकल छात्र भी शामिल हैं जो परीक्षा के प्रश्न पत्र हल करने के लिए लखीसराय पहुंचे थे।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस सॉल्वर गैंग के साथ बायोमेट्रिक कंपनी के कुछ स्टाफ की मिलीभगत भी सामने आई है। डीएम ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि बायोमेट्रिक डेटा के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी।
जांच जारी, बड़े खुलासे की उम्मीद
लखीसराय के डीएम और पुलिस के आला अधिकारी लगातार पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ के दौरान कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है और इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सकता है। पुलिस का मानना है कि यह केवल एक जिला नहीं बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फैला एक बड़ा गैंग हो सकता है। फिलहाल सभी 24 आरोपियों को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

