राजधानी दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव और संभावित बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए सोमवार को उपराज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu) ने दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए गए इंतजामों और मानसून के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा, मंत्री आशीष सूद समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान राजधानी के संवेदनशील इलाकों में जलभराव रोकने, जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान LG तरनजीत सिंह संधू ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि मानसून के दौरान यदि कहीं बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होती है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित कार्रवाई और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राजधानी में जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों की संख्या में लगातार कमी आई है। वर्ष 2024 में दिल्ली में 194 जलभराव वाले स्थान चिह्नित किए गए थे, जो 2025 में घटकर 169 रह गए। वहीं, 2026 में अब तक ऐसे स्थानों की संख्या घटकर सिर्फ 34 रह गई है। इसके अलावा, वर्ष 2024 से 2025 के बीच 53 ऐसे स्थान थे, जहां दोबारा जलभराव की समस्या सामने आई थी। हालांकि, 2025 से 2026 के बीच यह संख्या घटकर केवल 5 रह गई है। अधिकारियों ने इसे विभिन्न विभागों द्वारा किए गए सुधारात्मक कार्यों और बेहतर समन्वय का परिणाम बताया।

इस बीच मौसम विभाग द्वारा राजधानी में अचानक भारी बारिश की संभावना जताए जाने पर LG ने अधिकारियों को विशेष सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक उपायों को पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाए, जबकि दीर्घकालिक समाधान के लिए ड्रेनेज मास्टर प्लान पर तेजी से काम जारी रखा जाए। LG ने कहा कि राजधानी में जलभराव की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि कहीं बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होती है तो संबंधित अधिकारियों और विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने और आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

डी-सिल्टिंग का काम अंतिम चरण में

बैठक में नालों और सीवर लाइनों की डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम (MCD), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC), नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपने-अपने डी-सिल्टिंग लक्ष्य पूरे कर लिए हैं। वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने लगभग 95 प्रतिशत डी-सिल्टिंग का कार्य पूरा कर लिया है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने ट्रंक सीवर लाइनों की 85.5 प्रतिशत और सामान्य सीवर लाइनों की 91.1 प्रतिशत सफाई पूरी कर ली है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नालों से निकाली गई गाद का तत्काल निस्तारण किया जाए और कोई भी मैनहोल, सीवर लाइन या खुदाई वाला गड्ढा खुला न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति रहेगी और सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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