Bihar crime: बिहार के न्यायिक इतिहास में पारिवारिक हिंसा का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। मामला सुधीर कुमार नामक व्यक्ति से जुड़ा है, जो अपनी जमीन बेचकर शराब और ताड़ी के व्यसन में डूबा रहता था। जब उसके पुत्र आलोक कुमार उर्फ सचिन और परिवार के अन्य सदस्यों ने इस फिजूलखर्ची और जमीन बिक्री का विरोध किया, तो सुधीर कुमार ने इसे अपनी रंजिश बना लिया। विवाद इतना बढ़ा कि अभियुक्त ने जमीन खरीदने वालों को भी धमकाया।

​भोजन करते समय रेत दिया था बेटे का गला

​प्रतिशोध की आग में जल रहे सुधीर कुमार ने उस समय मानवता की सारी हदें पार कर दीं, जब उसका पुत्र आलोक कुमार शांति से भुजा खा रहा था। उसी दौरान अभियुक्त ने धारदार हथियार से अपने ही बेटे का गला रेतकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। इस घटना के बाद मृतक की पत्नी आभा देवी ने न्याय की गुहार लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।

​सात गवाहों की गवाही ने तय किया दोष

​लोक अभियोजक संतोष कुमार ने अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात महत्वपूर्ण गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इनमें मृतक की मां और अभियुक्त की पत्नी नूतन देवी, सूचिका आभा देवी, मृतक का भाई अनुपम कुमार, पड़ोसी अमित व रणधीर कुमार सहित डॉक्टर राजू और अनुसंधान कर्ता सुमंत चौधरी शामिल थे। इन गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 27 अप्रैल 2026 को सुधीर कुमार को अपने ही पुत्र की हत्या का दोषी करार दिया था।

​कोर्ट का फैसला: उम्रकैद और आर्थिक दंड

​बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋषिकांत महोदय की अदालत ने सजा के बिंदु पर अंतिम सुनवाई की। न्यायालय ने अभियुक्त सुधीर कुमार को आजीवन कारावास की कड़ी सजा सुनाई। साथ ही, उस पर ₹15,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना राशि अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को तीन माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

​पीड़ित परिवार को मुआवजे का निर्देश

​अदालत ने न केवल अपराधी को दंडित किया, बल्कि पीड़ित पक्ष के प्रति संवेदनशीलता भी दिखाई। जज महोदय ने मृतक की पत्नी (सूचिका) को उचित मुआवजा दिलाने हेतु जिला विधिक प्राधिकार (DLSA) को आदेश जारी किया है, ताकि बेसहारा हुए परिवार को आर्थिक संबल मिल सके।