वीरेन्द्र कुमार, दरभंगा। जिले के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत होरलपट्टी गांव स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के गुंबद पर रविवार की रात को आकाशीय बिजली (ठनका) गिरने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के समय मंदिर परिसर में करीब 25 श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे थे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई भी श्रद्धालु घायल नहीं हुआ और एक बड़ा हादसा टल गया।

गुंबद और मंदिर के ऊपरी हिस्से को नुकसान

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज बारिश, बादल गरजने और खराब मौसम के बीच अचानक मंदिर के गुंबद पर आकाशीय बिजली गिरी। इससे मंदिर के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भीड़ मंदिर परिसर में जुट गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर के क्षतिग्रस्त गुंबद की शीघ्र मरम्मत कराने तथा मंदिर की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

आस्था और इतिहास का केंद्र है जलेश्वरनाथ मंदिर

हायाघाट प्रखंड की मझौलिया पंचायत स्थित जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर एवं होरलपट्टी का प्रसिद्ध गंगासागर तालाब धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पहले गंगासागर तालाब में स्नान करते हैं और उसके बाद बाबा जलेश्वरनाथ महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन और पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस ऐतिहासिक तालाब का निर्माण दरभंगा राज के महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह की पत्नी महारानी लक्ष्मेश्वरी ने कराया था। जनश्रुति है कि उन्होंने तालाब की एक विशेष मछली को सोने की नथुनी पहनाई थी। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। करीब 150 वर्ष पुराने इस तालाब और मंदिर का धार्मिक महत्व आज भी बरकरार है।

मछली पकड़ने पर है परंपरागत रोक

ग्रामीणों का कहना है कि गंगासागर तालाब की मछलियों को पवित्र माना जाता है, इसलिए यहां मछली पकड़ने की परंपरागत रूप से मनाही है। कुछ समय पूर्व जब तालाब में एक क्विंटल से अधिक वजनी मछली मृत अवस्था में मिली थी, तब ग्रामीणों ने उसे निकालकर आपस में बांट लिया था। इसके बावजूद तालाब की मछलियों के संरक्षण की परंपरा आज भी कायम है।

उल्लेखनीय है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पूर्व में जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर एवं गंगासागर तालाब का दर्शन कर चुके हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर और तालाब की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए सरकार और प्रशासन को विशेष पहल करनी चाहिए।

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