दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu) ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार को अधिकारियों के नियमित तबादलों के लिए स्पष्ट नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत अधिकारियों का स्थानांतरण करने को भी कहा गया है। उपराज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनाने के लिए अधिकारियों का निश्चित अंतराल पर तबादला होना आवश्यक है। इससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और किसी एक पद पर लंबे समय तक बने रहने से उत्पन्न होने वाली संभावित समस्याओं को रोका जा सकेगा।

अधिकारियों के तबादलों पर एलजी संधू के निर्देश

अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल ने ये निर्देश दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (सतर्कता) के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दिए। बैठक में पिछले एक दशक से अधिक समय से लागू विभिन्न प्रणालियों, प्रक्रियाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान प्रशासनिक कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई। इसी क्रम में उपराज्यपाल ने अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित ट्रांसफर नीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि निश्चित अवधि के बाद अधिकारियों का स्थानांतरण प्रशासनिक दक्षता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी है। बैठक में यह भी विचार किया गया कि लंबे समय तक एक ही पद या विभाग में कार्यरत रहने से प्रशासनिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके बाद ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उनके तबादले की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए।

संवेदनशील विभागों की सूची पर भी LG सख्त

अधिकारियों के अनुसार, समीक्षा बैठक में उपराज्यपाल को बताया गया कि वर्तमान में लागू संवेदनशील विभागों की सूची में कई विसंगतियां हैं। कुछ ऐसे विभाग, जिनके पास बड़े पैमाने पर वित्तीय आवंटन और महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां हैं, उन्हें संवेदनशील विभागों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माने जाने वाले कुछ विभाग इस सूची में शामिल हैं।

इस जानकारी पर संज्ञान लेते हुए उपराज्यपाल ने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील विभागों की पूरी सूची की पुनर्समीक्षा करने और उसे मौजूदा प्रशासनिक तथा वित्तीय परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागों का वर्गीकरण उनकी जिम्मेदारियों, वित्तीय लेन-देन, निर्णय लेने की शक्तियों और सार्वजनिक हित पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

संवेदनशील विभागों में CVO की तैनाती के निर्देश

अधिकारियों के अनुसार, उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता, वित्तीय ईमानदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी सतर्कता व्यवस्था जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने सभी संवेदनशील विभागों में सीवीओ की नियुक्ति जल्द से जल्द करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, उपराज्यपाल ने सतर्कता विभाग को विभागीय मुख्य सतर्कता अधिकारियों की नियमित बैठकें आयोजित करने के लिए भी कहा है। इन बैठकों में विभिन्न विभागों में चल रहे सतर्कता कार्यों, शिकायतों की स्थिति, जांच प्रक्रियाओं और सुधारात्मक उपायों की समीक्षा की जाएगी। उनका मानना है कि नियमित निगरानी से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

बाजारों के प्रतिनिधियों से भी की चर्चा

इससे पहले उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने राजधानी के प्रमुख बाजारों के व्यापारिक संगठनों और बाजार संघों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की। इस बैठक में सरोजिनी नगर मार्केट, लाजपत नगर मार्केट, कनॉट प्लेस, मोरी गेट और चांदनी चौक समेत कई प्रमुख बाजारों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने व्यापारियों से बाजारों से जुड़ी समस्याओं और सुधार संबंधी सुझाव मांगे। प्रतिनिधियों ने अवैध अतिक्रमण, यातायात जाम, पार्किंग की कमी और बाजार क्षेत्रों में बेहतर नागरिक सुविधाओं की आवश्यकता जैसे मुद्दे उठाए।

उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली के प्रमुख बाजार न केवल व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र हैं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इन्हें लोगों के लिए अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित विभागों को व्यापारिक संगठनों के सुझावों पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

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