लखनऊ. चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शुक्रवार देर रात एक फर्जी बम कॉल ने सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया. डायल-112 पर बम होने की सूचना मिलते ही एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया. CISF, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड की टीमों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए पूरे एयरपोर्ट परिसर की सघन तलाशी शुरू कर दी.
करीब एक घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद जब कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली तो अधिकारियों ने राहत की सांस ली. अब पुलिस फर्जी कॉल करने वाले आरोपी से पूछताछ कर उसके मकसद का पता लगा रही है.
इसे भी पढ़ें- वाराणसी में पहली बार उल्टा एक्शन! पुरुषों से छेड़छाड़ के आरोप में दो युवतियां गिरफ्तार, एंटी रोमियो स्क्वॉड ने भेजा जेल
एक कॉल से हाई अलर्ट पर पहुंचीं सुरक्षा एजेंसियां
एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 11:45 बजे एक मोबाइल नंबर से डायल-112 पर एयरपोर्ट में बम होने की सूचना दी गई. सूचना मिलते ही रात 12 बजे से 1 बजे तक एयरपोर्ट परिसर, कार्गो टर्मिनल, एंट्री गेट और यात्रियों के सामान की गहन जांच की गई. सुरक्षा एजेंसियों ने हर संभावित स्थान की बारीकी से तलाशी ली ताकि किसी भी खतरे को समय रहते टाला जा सके.
जांच में नहीं मिला कोई संदिग्ध सामान
तलाशी अभियान के दौरान बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और CISF की टीमों ने पूरे एयरपोर्ट को खंगाला, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली. इस बीच कॉल करने वाले व्यक्ति से दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला. इसके बाद अधिकारियों ने प्राथमिक जांच में कॉल को फर्जी माना.
कानपुर से हिरासत में लिया गया आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार सुबह सरोजनीनगर थाने में उप निरीक्षक निशु चौधरी की तहरीर पर मोबाइल नंबर के आधार पर एनसीआर दर्ज की गई. पुलिस ने सर्विलांस के जरिए नंबर की लोकेशन ट्रेस की, जो कानपुर के बिधूना क्षेत्र के जयसिंहपुर गांव में मिली. इसके बाद पुलिस ने श्याम सुंदर (30), पुत्र राज किशोर, को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी.
इसे भी पढ़ें- Examination, Education के बाद EVM की बारी! सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का बड़ा बयान, चुनावी घपलों का जिक्र कर दे डाली चेतावनी
फर्जी कॉल के पीछे की वजह तलाश रही पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने एयरपोर्ट पर बम होने की झूठी सूचना क्यों दी. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की फर्जी कॉल न केवल सुरक्षा एजेंसियों के संसाधनों का दुरुपयोग करती हैं, बल्कि यात्रियों में दहशत फैलाने का भी कारण बनती हैं. पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


