बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही युवाओं, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है. उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है. ऐसे मामलों में केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय कर उच्च अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए.

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पेपर लीक से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर

मायावती ने कहा कि मेडिकल सहित कई अखिल भारतीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के रद्द होने या विवादों में घिरने से लाखों छात्र-छात्राओं की मेहनत प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि युवाओं का सरकार और परीक्षा प्रणाली से विश्वास कमजोर नहीं होना चाहिए. इसके लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करना जरूरी है.

सरकारी शिक्षा मजबूत करने और कोचिंग संस्थानों की निगरानी की मांग

बसपा प्रमुख ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण सरकारी स्कूलों की कमी के कारण निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों पर लोगों की निर्भरता लगातार बढ़ रही है. महंगाई के बावजूद परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी खर्च उठा रहे हैं. उन्होंने सरकार से प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकारी संस्थानों को मजबूत बनाने, शिक्षा पर पर्याप्त बजट खर्च करने और कोचिंग संस्थानों पर भ्रष्टाचारमुक्त एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की.

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‘स्थायी रोजगार चाहिए, सिर्फ आउटसोर्सिंग नहीं’

मायावती ने कहा कि देश का युवा केवल अस्थायी या आउटसोर्सिंग आधारित रोजगार नहीं, बल्कि सम्मानजनक और स्थायी नौकरी चाहता है. उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षित, सुरक्षित और कल्याणकारी भारत का निर्माण ही देश के विकास की असली नींव है. उन्होंने जंतर-मंतर पर विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं का भी जिक्र किया और सरकार से उनकी समस्याओं का सहानुभूतिपूर्वक समाधान निकालने की अपील की.