लखनऊ. उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है. हरियाणा विधानसभा की उच्चस्तरीय शिक्षा समिति ने लखनऊ दौरे के दौरान प्रदेश के शिक्षा मॉडल का अध्ययन किया और डिजिटल गवर्नेंस, छात्र कल्याण, कौशल विकास तथा शैक्षिक सुधारों की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया.

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शिक्षा व्यवस्था का किया विस्तृत अध्ययन

समिति ने विधानसभा सभागार में आयोजित प्रस्तुतीकरण में उच्च शिक्षा, बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी ली. अधिकारियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत किए जा रहे सुधारों और तकनीक आधारित शिक्षा प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी.

डिजिटल गवर्नेंस और नई योजनाओं की सराहना

विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में 24 राज्य विश्वविद्यालय, 56 निजी विश्वविद्यालय, एक डीम्ड और एक मुक्त विश्वविद्यालय संचालित हैं. इसके अलावा 71 नए राजकीय महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 46 में शैक्षिक सत्र 2025-26 से पढ़ाई शुरू हो चुकी है.

समिति को च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट व्यवस्था, ई-ऑफिस, समर्थ पोर्टल, मानव संपदा पोर्टल, मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना, स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना, मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना और रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना जैसी पहलों की जानकारी भी दी गई.

स्कूल शिक्षा के नवाचारों ने भी जीता दिल

अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए ऑपरेशन कायाकल्प, मुख्यमंत्री मॉडल एवं अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, ड्रीम लैब, निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्या समीक्षा केंद्र जैसे नवाचारों की जानकारी साझा की.

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‘दूसरे राज्यों के लिए मिसाल’ बना यूपी मॉडल

हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक-सक्षम, गुणवत्तापूर्ण और छात्र-केंद्रित व्यवस्था विकसित की है. समिति के अनुसार, यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक और अनुकरणीय है, इससे शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.