Omya Bull Passes Away: उसकी सिर्फ रफ्तार तक सीमित नहीं थी। वह पूरे महाराष्ट्र का लाडला था। वह जब बैलगाड़ी रेस मं उतरता था तो बिजली जैसी तेजी के आगे सारे बैल पीछे छूट जाते थे। तभी तो उसे ‘भारत केसरी’ की उपाधि दी गई थी। हम यहां जिसकी बात कर रहे हैं वो एक बैल है। ये बैलगाड़ी रेस का चैंपियन ‘ओम्या बैल’ है। 3 जेसीबी, 8 थार, 12 ट्रॅक्टर और 175 बाइक समेत अनगिनत पुरस्कार जीतने वाले ‘ओम्या बैल’ का निधन हो गया है। 27 अगस्त की दोपहर उसका दुखद निधन हुआ। ओम्या के निधन से महाराष्ट्र के मावल तालुका में बैलगाड़ी मालिकों और उसके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

ओम्या अपने मालिक रामनाथ वारंगे के लिए परिवार के सदस्य से कम नहीं था। ओम्या न सिर्फ लगातार रेस जीतता रहा, बल्कि इनाम में मिली महंगी गाड़ियों और मशीनों ने अपने मालिक की किस्मत बदल दी थी। अब ओम्या की मौत के बाद रामनाथ वारंगे सदमे में हैं। ओम्या के जाने से रामनाथ वारंगे पूरी तरह टूट गए हैं। जिस बैल ने वर्षों तक जीत की मालाएं पहनीं और अपने मालिक को करोड़ों की संपत्ति दिलाई, उसकी मौत के बाद वही मालिक उसकी यादों में डूबा है।

सैकड़ों बैलगाड़ी प्रेमियों की उपस्थिति में ओम्या को अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर बैलगाड़ी मालिक रामनाथ वारिंगे को रोते देखकर उपस्थित लोगों की आंखों में भी आंसू आ गए। कई गणमान्य व्यक्तियों ने ओम्या को श्रद्धांजलि अर्पित की और उसे मावल का गौरव बताया। लोगों ने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ के मैदान में ओम्या की गति, दृढ़ संकल्प और छाप हमेशा याद रहेगी।

ओम्या ने जीते ये पुरस्कार

मावल का ‘भारत केसरी’ ओम्या वारंगवाड़ी के रामनाथ वारिंगे का प्रसिद्ध बैल था। पिछले 9 वर्षों से ओम्या ने महाराष्ट्र की विभिन्न बैलगाड़ी दौड़ में अपनी गति का दबदबा कायम रखा था। एक प्रतियोगिता में करीब 1200 बैलगाड़ियों के बीच प्रथम आने का रिकॉर्ड भी उसके नाम रहा। बताया जाता है कि उसने महज 11 सेकंड 22 के समय में दौड़ पूरी कर शानदार प्रदर्शन किया था। ओम्या की जीत का सिलसिला सिर्फ ट्रॉफियों तक सीमित नहीं रहा। उसकी कामयाबी ने मालिक रामनाथ वारंगे की किस्मत बदल दी थी। विभिन्न प्रतियोगिताओं में ओम्या ने 3 जेसीबी, 8 थार, बोलेरो, 12 ट्रैक्टर, 3 बोलेरो, 175 बाइक, 25 चांदी के गदा और 1500 से अधिक पदक जीते थे। इसके अलावा ओम्या ने बुलेट, स्वर्ण पदक और नकद जैसे कई पुरस्कार भी जीते थे। ओम्या को ‘मावल किंग’, ‘भारत केसरी’, ‘महाराष्ट्र केसरी’, ‘मावल की राजधानी एक्सप्रेस’, ‘तूफानी गति का बेताज बादशाह’ और ‘बैलगाड़ी क्षेत्र का कोहिनूर’ जैसे नामों से पुकारा जाता था। ओम्या को साल 2024 में मावल महोत्सव में बैलगाड़ी दौड़ के राजा ओम्या को मावल किंग के रूप में विशेष रूप से सम्मानित किया गया था।

ओम्या को खाने में ये दिया जाता था

ओम्या की देखभाल भी बेहद खास तरीके से की जाती थी। उसे उड़द दाल, मूंगफली का आटा, नमक, घी, अंडे और बादाम जैसे पौष्टिक आहार दिए जाते थे। रामनाथ के लिए वह सिर्फ रेस का बैल नहीं था, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा था।

इस तरह हुई मौत

27 अगस्त को ओम्या ने रोज की तरह पानी पिया और कुछ देर शांत बैठा रहा। इसके बाद वह अपने सींगों से मिट्टी खोदने लगा. करीब आधे घंटे बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई। पशु चिकित्सकों के मुताबिक, उसे किसी जहरीले जीव ने काटा था।

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