बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं। अपनी पहली बैठक में सीएम ने ममता सरकार के कई फैसलों को पलट दिया। सबसे पहले उन्होंने केंद्र सरकार के आयुष्मान भारत योजना को पूरे राज्य में लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही, 45 दिनों के भीतर बीएसएफ को बॉर्डर की बाड़बंदी के लिए जमीन देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए उम्र की सीमा भी 5 साल की बढ़ोतरी कर दी। इसी कड़ी में अब सीएम सुवेंदु ने राज्य के बहुचर्चित आरजी कर कांड में शुक्रवार को अब तक की सबसे बड़ी कारवाई की है।
राज्य सचिवालय नवान्न में दोपहर में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के तीन वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों विनीत गोयल (कोलकाता पुलिस के तत्कालीन पुलिस आयुक्त), इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता के निलंबन की घोषणा की। सुवेंदु ने तीनों आइपीएस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के भी निर्देश दिए हैं।
केस की जांच के लिए बनेगा आयोग
सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार आरजी कर मामले में कोलकाता के पूर्व सीपी विनीत गोयल और 2 अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करेगी। हालिया चुनाव में पीड़िता की मां ने चुनाव लड़कर जीत हासिल की और यह मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बन गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले ही इस कांड की जांच के लिए आयोग बनाने की बात कह चुके हैं अब घोषणा होना बाकी है। नए मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि महिला सुरक्षा के मामलों में सख्त कार्रवाई होगी। आरजी कर पीड़िता की मां भी इस बार भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीती हैं।
टीएमसी के पूर्व विधायक समेत तीन लोगों की गिरफ़्तारी की मांग
वहीं आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और हत्या मामले में पीड़िता के माता-पिता ने सियालदह कोर्ट में याचिका दायर कर तीन लोगों की गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ की मांग की है। परिवार का आरोप है कि इन लोगों ने उनकी बेटी के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करवाने और अहम सबूत मिटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोर्ट में दाखिल याचिका में पूर्व पानीहाटी विधायक निर्मल घोष, सोमनाथ दास और स्थानीय तृणमूल कांग्रेस पदाधिकारी संजीव मुखोपाध्याय के नाम शामिल किए गए हैं। पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि घटना के बाद इन तीनों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज से शव को लगभग हाईजैक कर लिया था। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करवाया गया।
परिवार ने किए ये दावे
- पीड़िता के परिवार की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम होने से रोकने की कोशिशें भी की गईं।
- साथ ही आरोप लगाया गया कि अंतिम संस्कार से पहले परिवार को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
- पीड़िता के परिवार के वकील ने अदालत में कहा कि घटना के तुरंत बाद आरोपियों का व्यवहार बेहद संदिग्ध था। इसलिए उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सीबीआई ने कोर्ट में क्या कहा
सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो के वकील ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी को यह निर्देश नहीं दिया जा सकता कि वह किन लोगों को गिरफ्तार करें। हालांकि CBI ने मामले में औपचारिक जवाब दाखिल करने पर सहमति जताई और रिपोर्ट जमा करने के लिए 5 जून तक का समय मांगा। अब इस मामले की सुनाई 5 जून को होगी।
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