शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर एक बार फिर विरोध की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने 18 जून को पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस दौरान संघ द्वारा जिला कलेक्टरों और सांसदों के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

मानसून सत्र में अध्यादेश लाने की मांग

शिक्षक संघ की मुख्य रणनीति आगामी मानसून सत्र को लेकर है। संघ की मांग है कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में एक अध्यादेश (Ordinance) लेकर आए। अपनी इस बात को मजबूती से रखने के लिए शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय शिक्षा मंत्री से भी मुलाकात करेगा।

शिक्षक संघ की दो प्रमुख मांगें

शिक्षक संघ ने इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए दो मुख्य मांगें सरकार के सामने रखी हैं। पहली टीईटी (TET) की विसंगतियों को दूर करने के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में विशेष अध्यादेश लाया जाए। दूसरी- जो शिक्षक राज्य स्तरीय संविदा शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ष 2003 और 2005 में उत्तीर्ण कर चुके हैं, उन्हें TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के दायरे से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।

क्यों आक्रोशित हैं शिक्षक

नियमों के मुताबिक, साल 2009 के पहले के नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए भी अब TET देना अनिवार्य किया जा रहा है। यदि यह नियम सख्ती से लागू होता है, तो प्रदेश के करीब डेढ़ लाख (1.5 लाख) अनुभवी शिक्षकों को दोबारा परीक्षा के दौर से गुजरना होगा। शिक्षक संघ इसी नियम का पुरजोर विरोध कर रहा है।

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