चंडीगढ़। हरियाणा प्रशासनिक हलके से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सूबे के तीन सीनियर आईएएस और एक आईएफएस अधिकारी के ठिकानों पर सीबीआई ने रविवार देर रात एक साथ छापेमारी की है। चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर समेत कुल छह जगहों पर यह कार्रवाई की गई है। यह पूरी रेड हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के सरकारी फंड में हुई 661 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय गड़बड़ी के मामले में की गई है। सीबीआई की इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
इन बड़े अधिकारियों के घरों पर पहुंची टीमें
सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने हरियाणा कैडर के सीनियर आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शाइन, प्रदीप कुमार और आईएफएस नवनीत कुमार श्रीवास्तव के सरकारी और निजी आवासों पर दबिश दी। इसके साथ ही नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी मेसर्स विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। घंटों चली इस सर्चिंग के दौरान सीबीआई ने कई अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को अपने कब्जे में ले लिया है।
बैंककर्मियों के साथ मिलकर रची गई थी पूरी साजिश
जांच एजेंसी की शुरुआती तफ्तीश में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पता चला है कि इन रसूखदार अधिकारियों ने बैंक के कर्मचारियों के साथ सांठगांठ की थी। इसके बाद कथित रूप से फर्जी खाते खुलवाए गए और सरकारी पैसे को उन अनधिकृत अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया गया। सीबीआई अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि इस करोड़ों रुपये के खेल के बदले इन अफसरों को निजी तौर पर क्या-क्या फायदे या कमीशन मिले।
पहले 560 करोड़ का था फ्रॉड, अब बढ़ा आंकड़ा
इस पूरे मामले की शुरुआती जांच हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने की थी। पहले इस आईडीएफसी बैंक फ्रॉड में 560 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का अनुमान था, जो आगे की जांच में बढ़कर 661 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। जब मामले में बड़े आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आने लगे, तो इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
दो महीने पहले हुई कोठी की डील पर टिकी नजरें
जांच टीम को पता चला है कि पंचकूला के एक पॉश सेक्टर में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने करीब एक कनाल की कोठी खरीदी थी। यह प्रॉपर्टी खुद के नाम पर न लेकर किसी करीबी रिश्तेदार के नाम पर दर्ज कराई गई थी। इस कोठी की खरीद-फरोख्त का लेनदेन करीब दो महीने पहले ही हुआ था। सीबीआई को इस डील से जुड़े कुछ संदिग्ध कागजात हाथ लगे हैं। अब इन सभी अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
कंपनी के खाते से निजी अकाउंट में गया पैसा
सीबीआई के मुताबिक, घोटाले से कमाए गए पैसे को पहले विपम कंसल्टेंसी कंपनी के खाते में डाला गया और फिर वहां से उसे सीधे डायरेक्टर के पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसमें हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आई है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक में रखे सरकारी फंड को फर्जी तरीके से दूसरे खातों में डायवर्ट किया गया था।
इन पदों पर तैनात थे ये अधिकारी
जिस समय यह पूरा घोटाला हुआ, उस दौरान मोहम्मद शाइन हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर थे। वहीं पंकज अग्रवाल कृषि विभाग के प्रशासनिक सचिव और प्रदीप कुमार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इनके अलावा आईएफएस नवनीत कुमार श्रीवास्तव चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी के पूर्व सीईओ रह चुके हैं।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी कई और लोगों की मुश्किलें
सीबीआई के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इसमें शामिल कुछ और बड़े चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसी जल्द ही कोर्ट में एक पूरक चार्जशीट भी दाखिल करने की तैयारी में है। इससे पहले भी दो आईएएस अधिकारियों से घंटों पूछताछ की जा चुकी है। आईएएस शाइन के घर पर तो आठ अधिकारियों की टीम दोपहर से लेकर रात तक जमी रही और सारे रिकॉर्ड खंगालती रही।

