दिल्ली सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके निगमित किए जाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अब इस विधेयक को विचार और पारित किए जाने के लिए दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने कहा कि यह विधेयक दिल्ली में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगा। उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से राजधानी में विश्वस्तरीय निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था तैयार की जाएगी।

सरकार के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना, अनुसंधान (रिसर्च) और नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा देना, उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) को प्रोत्साहित करना तथा उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत बनाना है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक साझेदारियों को बढ़ावा देकर दिल्ली को वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की भी योजना है।

अब बेहतर शिक्षा के लिए नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली से बाहर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली उन चुनिंदा बड़े क्षेत्रों में शामिल रही है, जहां निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए अब तक कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा उपलब्ध नहीं था। इसके कारण बड़ी संख्या में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए पड़ोसी राज्यों या विदेशों का रुख करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक लागू होने के बाद दिल्ली के छात्रों को अपने ही शहर में विश्वस्तरीय और प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों के लिए शैक्षणिक विकल्पों का दायरा बढ़ेगा और उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों या देशों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

सीमित भूमि के अनुरूप आधुनिक विश्वविद्यालयों का मॉडल

दिल्ली सरकार के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं और उनके ऑफ-कैंपस केंद्रों के लिए भी राजधानी में अपनी उपस्थिति स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे दिल्ली देश और दुनिया के प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्रों में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकेगी। सरकार का कहना है कि दिल्ली की भौगोलिक सीमाओं और सीमित भूमि उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए विधेयक में पारंपरिक और बड़े भू-भाग आधारित परिसरों की अनिवार्यता से आगे बढ़कर आधुनिक दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके तहत केवल विशाल क्षैतिज कैंपस पर जोर देने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, पर्याप्त बुनियादी ढांचा, अनुसंधान क्षमता, छात्र सुविधाएं और संस्थागत प्रशासन (गवर्नेंस) जैसे मानकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत दिल्ली जैसे सीमित भूमि वाले महानगर में आधुनिक, बहुमंजिला और शहरी विश्वविद्यालय परिसरों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि, मजबूत होगी जवाबदेही

दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित विधेयक में विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत प्रत्येक पाठ्यक्रम में दिल्ली के छात्रों के लिए लागू आरक्षण नीति के अनुरूप 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, जिससे स्थानीय विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकें। विधेयक के अनुसार सभी निजी विश्वविद्यालयों में पारदर्शी, निष्पक्ष और भेदभावरहित प्रवेश प्रक्रिया सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। साथ ही प्रवेश, परीक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

सरकार पर नहीं पड़ेगा वित्तीय बोझ

प्रस्तावित विधेयक के तहत निजी विश्वविद्यालयों के संचालन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत नियामकीय व्यवस्था स्थापित की जाएगी। इसके लिए दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो शिक्षण व्यवस्था, अनुसंधान गतिविधियों, संस्थागत प्रशासन, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाओं, छात्र अभिलेखों और विश्वविद्यालयों के समग्र प्रदर्शन की निगरानी करेगी। आवश्यकता पड़ने पर यह प्राधिकरण सुधारात्मक निर्देश जारी करने की शक्ति भी रखेगा। विधेयक के अनुसार किसी भी निजी विश्वविद्यालय को स्थापित करने से पहले उसके प्रस्ताव की विस्तृत और बहुस्तरीय जांच की जाएगी। इसके लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रतिनिधियों तथा वित्त विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी, जो सभी प्रस्तावों का गहन परीक्षण करेगी।

दिल्ली को नॉलेज कैपिटल बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कभी भी पुराने नियमों, प्रक्रियागत बाधाओं या संस्थागत सीमाओं के कारण प्रभावित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों तक बेहतर पहुंच मिलनी चाहिए, चाहे वे सार्वजनिक क्षेत्र के हों या निजी, बशर्ते वे पारदर्शिता, जवाबदेही और शैक्षणिक उत्कृष्टता के सर्वोच्च मानकों का पालन करें। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी यह ऐतिहासिक निर्णय केवल नए शिक्षण संस्थानों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली के संपूर्ण उच्च शिक्षा परिदृश्य को नई दिशा देने वाला कदम है। इससे शिक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलेगी तथा उद्योग, शिक्षा और कौशल विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल से रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे तथा दिल्ली एक भविष्य उन्मुख, ज्ञान आधारित और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित होगी। इससे विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे, अभिभावकों का विश्वास मजबूत होगा और राजधानी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ दिल्ली को देश की ‘नॉलेज कैपिटल’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल साबित होगा।

दिल्ली के युवाओं को मिलेगी विश्वस्तरीय शिक्षा: शिक्षा मंत्री

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दशकों तक दिल्ली ने एक अजीब विरोधाभास देखा। भारत की राजधानी उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का प्रमुख केंद्र तो बनी रही, लेकिन गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को अक्सर अपने ही शहर से बाहर जाना पड़ता था। जबकि पड़ोसी राज्यों में विश्वस्तरीय निजी विश्वविद्यालय स्थापित होते रहे, दिल्ली के विद्यार्थियों के पास ऐसे संस्थानों के सीमित विकल्प उपलब्ध थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस ऐतिहासिक विसंगति को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रस्तावित विधेयक राजधानी में उच्च शिक्षा के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा और छात्रों को अपने ही शहर में वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देगा।

आशीष सूद ने कहा कि यह कानून केवल निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली के युवाओं को विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों या देशों का रुख न करना पड़े। इससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के बेहतर अवसर मिलेंगे।

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