वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED द्वारा अटैच की गई 6 अचल संपत्तियों के बदले 4 करोड़ 36 लाख 5 हजार 780 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को वैकल्पिक सुरक्षा के तौर पर स्वीकार करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई 31 अगस्त को जस्टिस बिभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच में हुई।

6 अचल संपत्तियों को मुक्त कराने की थी मांग
याचिकाकर्ता ऋषभ सोनी और एक अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ED की ओर से अटैच छह अचल संपत्तियों को मुक्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि ये संपत्तियां अपराध की सीधी आय नहीं हैं, बल्कि PMLA की धारा 2(1)(u) के तहत समकक्ष मूल्य के तौर पर अटैच की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संपत्तियों के मूल्य के बराबर FD जमा कराए जाने से ED का हित सुरक्षित रहेगा और कारोबार भी प्रभावित नहीं होगा।
ED ने याचिका का किया विरोध
ED ने इसका विरोध करते हुए कहा कि PMLA या 2013 के नियमों में अटैच अचल संपत्ति को स्वेच्छा से FD से बदलने का कोई सामान्य वैधानिक अधिकार नहीं दिया गया है। नियम 5(5) भी केवल विशेष परिस्थितियों में लागू होता है और इसमें FD स्वीकार करना अनिवार्य नहीं है।
FD देने का सामान्य अधिकार नहीं- हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने माना कि अटैच संपत्ति के बदले FD देने का कोई सामान्य अधिकार कानून में नहीं है। केवल वित्तीय या व्यावसायिक कठिनाई के आधार पर संपत्ति को बदलने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि PMLA की धारा 42 के तहत वैधानिक अपील का विकल्प उपलब्ध है। ऐसे में अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिका में कोई आधार नहीं पाते हुए इसे खारिज कर दिया।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H


