परवेज खान, शिवपुरी। तेंदुए की खाल की बरामदगी और कथित वन्यजीव तस्करी के मामले की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जिसने वन्यजीव संरक्षण के दावों पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य बाघ प्रहार बल (STPF) की जांच में दिल्ली की वन्यजीव बचाओ संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्तिक सत्यनारायण का नाम सामने आने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है। उन्हें सोमवार 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि कार्तिक सत्यनारायण पेश होते है य नही य फिर उनकी ओर से क्या पक्ष रखा जाता है। हालांकि मामले में ऑन कैमरा जब भुवनेश कुमार योगी,स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स अधिकारी शिवपुरी से बात करने की कोसिस की गई तो वह अधिकृत बयान देने से दूरी बनाते नजर आए
मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार वन्यजीव तस्करों और संस्था के पदाधिकारियों के बीच आखिर किस तरह का संपर्क था और क्या किसी स्तर पर तेंदुए की खाल से जुड़े कथित नेटवर्क में कोई भूमिका रही।
गिरफ्तारी के बाद सामने आया बड़ा नाम
तेंदुए की खाल की बरामदगी और कथित तस्करी के मामले में राज्य बाघ प्रहार बल ने कुछ दिन पहले भगवान सिंह उर्फ सलीम और उसके सहयोगी वसीम को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिया और उनके निर्देश पर काम करने की बात कही। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है। इसी कारण जांच एजेंसी ने अब सत्यनारायण को नोटिस देकर उनका पक्ष जानने और आरोपों की वास्तविकता जांचने की प्रक्रिया शुरू की है।
जांच का दायरा बढ़ा, संपर्कों की होगी पड़ताल
जांच अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गिरफ्तार आरोपियों और कार्तिक सत्यनारायण के बीच संपर्क किस स्तर का था। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि वन्यजीव शिकार, जब्ती अथवा तस्करी से जुड़ी गतिविधियों में आरोपियों की कोई भूमिका थी या नहीं और यदि थी तो उनके पीछे कौन लोग सक्रिय थे। जांच एजेंसी डिजिटल प्रमाणों, संपर्कों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि कहीं वन्यजीव संरक्षण के नाम पर संचालित गतिविधियों की आड़ में किसी प्रकार का अवैध नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।
‘शिकार रोकने’ वाली संस्था ही जांच के घेरे में
सबसे गंभीर पहलू यह है कि संबंधित संस्था स्वयं वन्यजीव संरक्षण और अवैध वन्यजीव व्यापार के खिलाफ काम करने का दावा करती है। ऐसे में संस्था के प्रमुख पदाधिकारी का नाम कथित वन्यजीव तस्करी मामले में सामने आना जांच को और संवेदनशील बना देता है। संस्था की वेबसाइट पर कार्तिक सत्यनारायण को मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक बताए जाने का उल्लेख है। अब जांच एजेंसी यह स्पष्ट करना चाहती है कि गिरफ्तार आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संस्था अथवा उसके पदाधिकारियों का आरोपियों से वास्तविक संपर्क किस उद्देश्य से था।
STPF की कार्रवाई के बाद इस मामले में हलचल तेज हो गई है। 17 अगस्त को होने वाली पूछताछ में जांच एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर सामने आए सवालों के जवाब तलाश सकती है। फिलहाल कार्तिक सत्यनारायण के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और नोटिस को जांच प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। लेकिन जिस तरह गिरफ्तार आरोपियों के बयान में उनका नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा है, उससे यह मामला वन्यजीव तस्करी से आगे बढ़कर संरक्षण के नाम पर काम करने वाली संस्थाओं की गतिविधियों की जांच तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। अब बड़ा सवाल यही है- तेंदुए की खाल के इस पूरे मामले में गिरफ्तार तस्करों और कथित वन्यजीव संरक्षण संस्था के बीच वास्तविक कड़ी क्या थी? इसका जवाब STPF की जांच और पूछताछ के बाद ही साफ होगा।
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