लुधियाना। पंजाब की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। लुधियाना के दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली कल यानी 9 जून को आधिकारिक तौर पर अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होने जा रहे हैं। हाल ही में ‘शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत’ के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद से ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जिस पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी में शामिल होने के इस फैसले ने अयाली के राजनीतिक जीवन में एक नया अध्याय खोल दिया है।
राष्ट्रीय या दिल्ली-नियंत्रित पार्टियों से बना ली थी दूरी
मनप्रीत सिंह अयाली ने पहले ही यह पूरी तरह साफ कर दिया था कि उनका किसी भी राष्ट्रीय या दिल्ली से नियंत्रित होने वाले राजनीतिक दल में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। इस्तीफा देते वक्त उन्होंने दृढ़ता से कहा था कि चाहे राजनीतिक दबाव कितना भी क्यों न हो, वे भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) या फिर सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई वाले शिरोमणि अकाली दल (SAD) में कभी शामिल नहीं होंगे। अयाली ने उस समय स्पष्ट संकेत दिया था कि पंजाब की क्षेत्रीय पहचान और पंथक राजनीति ही उनके मुख्य मुद्दे रहेंगे और वे इन सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगे।
पंथ और पंजाब की तरक्की के लिए काम करता रहूंगा
अपने भविष्य की रणनीति और प्राथमिकताओं पर बात करते हुए मनप्रीत अयाली ने कहा था कि उनका अगला कोई भी फैसला सिख भावनाओं और पंथक भाईचारे की उम्मीदों के अनुरूप ही होगा। उन्होंने दोहराया कि वे हमेशा पंथ और पंजाब की भलाई व तरक्की के लिए समर्पित रहेंगे। इसके साथ ही इयाली ने अपने पूरे राजनीतिक सफर के दौरान चट्टान की तरह साथ खड़े रहने के लिए अपने समर्थकों और सिख संगत का आभार भी जताया था।

क्यों दिया था अकाली दल (पुनर सुरजीत) से इस्तीफा?
शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत के सभी पदों से अचानक इस्तीफा देने की वजहों का खुलासा करते हुए मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा था कि उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। पार्टी के भीतर उनके उठाए किसी भी मुद्दे को स्वीकार या हल नहीं किया जा रहा था। अयाली ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा था कि जब संगठन में कोई भी मुख्य मुद्दों को समझने या उन पर अपनी सहमति जताने के लिए तैयार न हो, तो ऐसे में केवल पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
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