अभय मिश्रा, मऊगंज। आपने सिनेमा के पर्दे पर ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ फिल्म तो जरूर देखी होगी, जहां बिना डिग्री का शख्स अस्पताल संभालता है। लेकिन मध्य प्रदेश के मऊगंज जिला मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल में यह रील लाइफ हकीकत बन चुकी है। यहां बाकायदा एक असली ‘मुन्नाभाई’ सरकारी डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर मरीजों की नब्ज टटोल रहा है, दवाइयां लिख रहा है और सिस्टम का मखौल उड़ा रहा है। डॉक्टर साहब खुद घर पर नोट छाप रहे हैं और अस्पताल को अपने चेले के भरोसे छोड़ गए हैं। आखिर किसकी शह पर चल रहा है मऊगंज अस्पताल में मौत का यह खुला खेल?
ये जो महाशय बड़े इत्मीनान से सरकारी डॉक्टर की मुख्य कुर्सी पर बैठकर मरीजों का भाग्य विधाता बने हुए हैं, इनका नाम है सत्यम पटेल उर्फ चमनलाल। इनके पास न तो डॉक्टरी की कोई डिग्री है और न ही सरकारी सेवा का कोई नियुक्ति पत्र। लेकिन मजाल है कि इनके रौब में कोई कमी आ जाए! मऊगंज सिविल अस्पताल की इस ओपीडी में चमनलाल ही डॉक्टर हैं, चमनलाल ही मसीहा हैं और चमनलाल ही यमराज के नुमाइंदे बने बैठे हैं।
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‘ठेके के डॉक्टर’ को कुर्सी पर बैठाया
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह सत्यम पटेल उर्फ चमनलाल असल में अस्पताल के डॉक्टर अवनीश कुमार का ‘निज सहायक’ यानी प्राइवेट क्लीनिक का नौकर है। डॉक्टर साहब को सरकारी ड्यूटी से ज्यादा अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस प्यारी है, इसलिए उन्होंने अस्पताल आने की जहमत उठाना ही बंद कर दिया। अपनी जगह इस ‘ठेके के डॉक्टर’ यानी चमनलाल को कुर्सी पर बैठाकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की खुली छूट दे दी गई।
वेंटिलेटर पर व्यवस्था
मऊगंज का यह जिला मुख्यालय अस्पताल इस समय भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही का जीता-जागता सुबूत बन चुका है। जब से बीएमओ प्रद्युम्न शुक्ला ने इस अस्पताल की कमान संभाली है, तब से यहां की व्यवस्था सुधरने के बजाय पूरी तरह वेंटिलेटर पर चली गई है। दूर-दराज से, 30 से 40 किलोमीटर का सफर तय करके गरीब ग्रामीण यहाँ अपना इलाज कराने आते हैं, लेकिन उन्हें क्या मिलता है? ओपीडी के कमरों पर लटके ताले और डॉक्टरों की बेरुखी!
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मरीजों की जान की जिम्मेदारी किसकी ?
अस्पताल के अंदर का नजारा रूह कंपा देने वाला है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाकर उनका इलाज किया जा रहा है। क्या बीएमओ प्रद्युम्न शुक्ला को यह नहीं पता कि एक बेड पर दो मरीजों को रखने से संक्रमण कितनी तेजी से फैल सकता है? आखिर इन मरीजों की जान की जिम्मेदारी किसकी है?
उठे गंभीर सवाल
आज पूरा मऊगंज इस वीडियो को देखकर हैरान है और पूछ रहा है की बीएमओ प्रद्युम्न शुक्ला के संरक्षण के बिना क्या किसी प्राइवेट बाहरी व्यक्ति की हिम्मत है कि वह सरकारी ओपीडी की कुर्सी पर बैठ सके ? क्या इस अस्पताल में मरीजों की जिंदगी को दांव पर लगाकर घर पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर अवनीश कुमार और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर पर कार्यवाही होगी ? या क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस खुली गुंडागर्दी पर अपनी आंखें और कान बंद करके बैठ जायेंगे ?
ये है ‘मुन्नाभाई’ के पीछे का असली मास्टरमाइंड
अब आपको इस ‘मुन्नाभाई’ के पीछे का असली मास्टरमाइंड बताते हैं। सूत्रों और पड़ताल से मिली जानकारी के मुताबिक, यह सत्यम पटेल उर्फ चमनलाल असल में अस्पताल के सरकारी डॉक्टर अवनीश कुमार सिंह का ‘निज सहायक’ है। यानी डॉक्टर साहब के प्राइवेट ‘बालाजी अस्पताल’ की लैब में काम करने वाला एक मामूली कर्मचारी। डॉक्टर साहब को सरकारी ड्यूटी से ज्यादा अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस और नोट छापने की मशीन प्यारी है। इसलिए उन्होंने सरकारी अस्पताल आने की जहमत उठाना ही बंद कर दिया और अपनी जगह इस ‘ठेके के डॉक्टर’ यानी चमनलाल को कुर्सी सौंप दी… ताकि गरीबों की जान की कीमत पर उनकी जेबें भरती रहें।
क्या जिम्मेदार अफसरों की खुलेगी नींद ?
इस सरकारी अस्पताल की यह बदहाली चीख-चीख कर कह रही है कि यहां गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं है। अगर मऊगंज सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की जगह चमनलाल जैसे मुन्नाभाई ही इलाज करेंगे, तो फिर इस स्वास्थ्य महकमे पर करोड़ों रुपए बहाने का क्या फायदा? अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटती है या फिर मऊगंज के मरीजों को इसी तरह राम भरोसे छोड़ दिया जाएगा।

