लखनऊ. स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर बहस तेज हो गई है. ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने हाईकोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई छात्रा अपनी मर्जी से हिजाब पहनना चाहती है तो उसे इससे रोका क्यों जाना चाहिए?

रशीदी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि स्कूल के नियमों के नाम पर किसी लड़की की पसंद का पहनावा उस पर नहीं थोपा जाना चाहिए. हालांकि, यह उनके निजी विचार हैं और हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्कूल के निर्धारित ड्रेस कोड का पालन जरूरी बताया है.

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10वीं तक हिजाब, 11वीं में रोक क्यों?

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि जिस छात्रा ने याचिका दाखिल की, वह दावा करती है कि उसने 10वीं कक्षा तक उसी स्कूल में हिजाब पहनकर पढ़ाई की. उनके मुताबिक सवाल यह है कि 11वीं में पहुंचने पर अचानक उसे हिजाब पहनने से क्यों रोका गया. उन्होंने कहा कि अगर पहले हिजाब की अनुमति थी तो स्कूल के ड्रेस नियमों में ऐसा क्या बदलाव हुआ, जिसके आधार पर छात्रा को 11वीं कक्षा में हिजाब पहनने से रोका गया.

‘हिजाब अनिवार्य नहीं तो पसंद की ड्रेस की आजादी क्यों नहीं?’

रशीदी ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें हिजाब को इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं बताया गया था. उन्होंने कहा कि अगर हिजाब को अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना जाता, तब भी किसी छात्रा की अपनी पसंद से कपड़े पहनने की आजादी का सवाल उठता है. उन्होंने स्कूलों के ड्रेस कोड पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगह लड़कियों की ड्रेस को लेकर अलग-अलग तरह के नियम बनाए जाते हैं. उनके अनुसार, किसी की पोशाक की पसंद को लेकर समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए.

‘स्कूल के नियम हैं, लेकिन ड्रेस नहीं थोपी जा सकती’

मौलाना रशीदी ने माना कि स्कूलों के अपने नियम और अनुशासन होते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड को लेकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी सम्मान होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर कोई लड़की हिजाब या दूसरे सामान्य कपड़े पहनना चाहती है तो उसे पूरी तरह रोका नहीं जाना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे को धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आजादी से भी जोड़ते हुए हिजाब को लेकर सवाल उठाने पर आपत्ति जताई.

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दरअसल, प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की एक छात्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी. छात्रा का कहना था कि वह 10वीं तक हिजाब पहनती रही, लेकिन 11वीं कक्षा में उसे इसकी अनुमति नहीं दी जा रही. याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी छात्र या छात्रा को स्कूल के निर्धारित ड्रेस कोड से अलग अपनी पसंद का पहनावा पहनने की असीमित अनुमति नहीं दी जा सकती. अदालत ने स्कूल में तय यूनिफॉर्म कोड का पालन आवश्यक बताया.