लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में 2016 में हुए दलित अत्याचार मामले में आरोपियों के बरी होने पर चिंता जताई है. शुक्रवार सुबह उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मामले में गुजरात सरकार से हस्तक्षेप की मांग की. मायावती ने कहा कि वह खुद इस घटना के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने गुजरात गई थीं और वहां की स्थिति को समझने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी.
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40 में से 35 आरोपी बरी होने पर मायावती ने जताई नाराजगी
बसपा प्रमुख ने कहा कि ऊना कांड में स्थानीय अदालत द्वारा बड़ी संख्या में आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए पीड़ित दलित परिवारों को आर्थिक और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बहुजन समाज के लोगों में चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं. मायावती ने आरोप लगाया कि मामले में सरकारी स्तर पर लापरवाही के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो रही है.
गुजरात सरकार से हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी की मांग
मायावती ने गुजरात सरकार से अपील की कि वह इस मामले में अपनी गलती सुधारते हुए हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी करे और सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाने का प्रयास करे. उन्होंने कहा कि न्याय मिलने से पीड़ित परिवारों को राहत मिलेगी और समाज में कानून का संदेश जाएगा. साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवारों को उनकी संतुष्टि के अनुसार सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराने की मांग भी रखी.
मायावती बोलीं- मेरी सरकार में गरीबों को मिली थी कानूनी सहायता
बसपा प्रमुख ने अपनी पिछली उत्तर प्रदेश सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार के समय गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता देने की व्यवस्था की गई थी. उन्होंने गुजरात सरकार से भी इसी तरह पीड़ित परिवारों की मदद करने की अपील की. उन्होंने कहा कि दलितों और कमजोर वर्गों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है और इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए.
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2016 में हुआ था ऊना दलित अत्याचार मामला
गुजरात के ऊना में वर्ष 2016 में दलित युवकों की कथित पिटाई का मामला देशभर में चर्चा में आया था. घटना के बाद बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और राजनीतिक दलों ने भी इसे लेकर सरकारों को घेरा था. अब आरोपियों के बरी होने के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है. मायावती ने गुजरात सरकार से पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.


