दिल्ली में आवारा कुत्तों ( stray dogs) के बढ़ते खतरे और रेबीज (Rabies) की रोकथाम को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली सरकार (Delhi Government) से आवारा कुत्तों में रेबीज खत्म करने के लिए तैयार की गई कार्य योजना को लागू करने को लेकर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। हाई कोर्ट ने इस मामले में MCD और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) से भी आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी को लेकर अब तक उठाए गए कदमों पर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
4 हफ्ते की मोहलत
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील को मामले में निर्देश लेने और न्यायमित्र की ओर से पेश की गई कार्य योजना व सिफारिशों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मामले में कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त न्यायमित्र ने 2030 तक भारत में कुत्तों से होने वाले रेबीज को खत्म करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की है। अब दिल्ली सरकार को इस योजना और उसमें दी गई सिफारिशों पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। अदालत ने MCD और NDMC को भी आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी को लेकर उठाए गए कदमों की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
43 कुत्तों की नसबंदी, अदालत को बताया
सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि MCD ने अगस्त और सितंबर में आनंद विहार वार्ड में चार कैंप लगाए। इन कैंपों के दौरान 43 आवारा कुत्तों को पकड़ा गया, उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया गया। इसके बाद उन्हें उनके संबंधित इलाकों में छोड़ दिया गया। MCD के वकील ने अदालत को बताया कि कैंपों को लेकर लोगों के बीच जागरूकता भी पैदा की गई थी और सभी संबंधित पक्षों ने इसमें सक्रिय सहयोग किया। उनके मुताबिक, कैंप बिना किसी रुकावट के आयोजित किए गए और किसी आम नागरिक या संस्था की ओर से इसका विरोध नहीं किया गया।
NDMC ने पकड़े 28 कुत्ते, 615 का टीकाकरण
पीठ को यह भी बताया गया कि NDMC ने भी आवारा कुत्तों के लिए कैंप लगाए, जिनमें 28 कुत्तों को पकड़ा गया। इसके अलावा 615 कुत्तों का टीकाकरण किया गया। स्कूलों में भी रेबीज और आवारा कुत्तों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अदालत ने MCD और NDMC को निर्देश दिया कि वे अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कितने कुत्तों को पकड़ा गया, कितनों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी दें। साथ ही दोनों निकायों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि उनके अधिकार क्षेत्र में कम से कम एक वार्ड को रेबीज मुक्त बनाया जाए।
सभी कुत्तों का हो टीकाकरण और नसबंदी
सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने अदालत को बताया कि आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी के लिए आगे भी लगातार कैंप लगाए जाएंगे। कोशिश की जाएगी कि कम से कम एक वार्ड को रेबीज मुक्त बनाया जा सके। अधिकारियों ने सभी आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी सुनिश्चित करने की बात भी कही। मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है। उस दौरान MCD और NDMC को अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर भी मांगी थी रिपोर्ट
इससे पहले हाई कोर्ट की पीठ ने दिल्ली सरकार और MCD को सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। हाई कोर्ट ने यह आदेश 19 मई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले में दिया था। अदालत इस मामले में दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या और उससे निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की निगरानी कर रही है।
आवारा कुत्तों के मुद्दे पर संतुलन की जरूरत
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि कुत्तों से प्यार करने वालों और उनसे परेशान लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि आए दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बंदरों के आतंक का मुद्दा भी गंभीर
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने बंदरों के आतंक को भी गंभीर समस्या बताया। अदालत ने कहा कि आवारा जानवरों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित एजेंसियों को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। इससे पहले 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों से निपटने के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा मजबूत करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिया था कि वे 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 के आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए स्वतः संज्ञान लेकर मामले दर्ज करें। सुप्रीम कोर्ट ने खासतौर पर शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लिया था और इनसे निपटने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। अब दिल्ली हाई कोर्ट की निगरानी में दिल्ली सरकार, MCD और NDMC को आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी के साथ-साथ रेबीज की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
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