दिल्ली के हौज रानी स्थित एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (B&B) में लगी भीषण आग में 23 लोगों की मौत के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में सामने आया है कि हादसे से महज एक दिन पहले दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने परिसर का निरीक्षण किया था और लाइसेंस के लिए अनुकूल रिपोर्ट दी थी। MCD की प्रारंभिक जांच के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कई गंभीर सुरक्षा खामियां मौजूद थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। आरोप है कि अधिकारी ने दस्तावेजों और मौके पर मौजूद वास्तविक स्थिति के बीच स्पष्ट विसंगतियों को अनदेखा करते हुए गलत और भ्रामक रिपोर्ट तैयार की। इसी रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस की सिफारिश की गई, जबकि परिसर में सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन हो रहा था।
कमियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया
जांच में पाया गया कि घटना से एक दिन पहले, 2 जून, 2026 को, असिस्टेंट पब्लिक हेल्थ इंस्पेक्टर प्रिंस मान ने होटल का निरीक्षण किया था। MCD के अनुसार, निरीक्षण सतही और लापरवाही भरे तरीके से किया गया। अधिकारी ने सुरक्षा कमियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया और गलत रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस की सिफारिश की। घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने उस हेल्थ अधिकारी की सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके अलावा, एमसीडी ने साउथ जोन के डिप्टी हेल्थ ऑफिसर का भी प्रशासनिक कारणों से तबादला कर मुख्यालय से अटैच कर दिया। MCD के 11 जून के ऑफिस ऑर्डर में कहा गया कि प्रिंस मान को उस इलाके में काम सौंपा गया था, जहां उन्होंने स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली कमियों को अनदेखा किया।
गुमराह करने वाली निरीक्षण रिपोर्ट
MCD के अनुसार, प्रिंस मान ने कार्यालय में जमा किए गए दस्तावेज़ों और वास्तविक स्थिति में साफ दिख रही कमियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। वहां नियमों का गंभीर उल्लंघन हो रहा था, लेकिन उन्होंने गलत और भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस की सिफारिश की। अधिकारियों का कहना है कि उनके पद पर बने रहना जनहित के लिए नुकसानदेह है। इस घटना के बाद, दिल्ली नगर निगम ने प्रिंस मान की सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके साथ ही, साउथ जोन के डिप्टी हेल्थ ऑफिसर का भी प्रशासनिक कारणों से मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। एमसीडी के 11 जून के ऑफिस ऑर्डर में कहा गया कि प्रिंस मान को उस इलाके में काम सौंपा गया था, जहां उन्होंने स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली कमियों को अनदेखा किया।
सिर्फ चाय और स्नैक्स की इजाजत थी
MCD अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हादसे से एक दिन पहले ही उस जगह का निरीक्षण किया गया और उसे लाइसेंस की मंजूरी दे दी गई थी। MCD की शुरुआती जांच में इलाके के इंस्पेक्टर को दोषी पाया गया। अधिकारियों ने मार्च 2026 में जमा किए गए हेल्थ ट्रेड लाइसेंस के आवेदन पर कार्रवाई में 78 दिनों की देरी की थी। जांच में यह भी सामने आया कि ‘फ्लोरिश स्टे B&B’ के ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे ‘स्नैक्स एंड बाइट्स’ को केवल चाय और स्नैक की दुकान चलाने की अनुमति थी। आमतौर पर इस तरह के लाइसेंस वाली दुकानों में पहले से पकी हुई चीजें बेची जाती हैं और वहां खाना गर्म करने या बैठकर खाने की सुविधा सीमित होती है। इसके बावजूद, यह जगह पूरा रेस्टोरेंट की तरह संचालित हो रही थी।
6 कमरे की जगह 25 कमरे बना लिए
जांचकर्ताओं ने बताया कि B&B को केवल 6 कमरे चलाने की अनुमति थी, लेकिन वहां 4 मंजिल, एक बेसमेंट और छत पर कम से कम 25 कमरे थे। आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता मौजूद नहीं था। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, मालिक लवकेश बजाज के पास पूरे रेस्टोरेंट चलाने का लाइसेंस नहीं था। उनके पास केवल चाय और स्नैक्स आउटलेट का लाइसेंस था, जिसमें खाना पकाने या बैठने की अनुमति नहीं थी। यह लाइसेंस 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया था। आग लगने के कुछ घंटे बाद ही बजाज ने लाइसेंस रिन्यूअल के लिए आवेदन किया, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।
जोनल डिप्टी हेल्थ ऑफिसर का भी ट्रांसफर
इस घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने प्रिंस मान की सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके साथ ही, साउथ जोन के डिप्टी हेल्थ ऑफिसर को प्रशासनिक कारणों से मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। एमसीडी के एक अन्य आदेश में साउथ जोन के इंचार्ज जोनल डिप्टी हेल्थ ऑफिसर, डॉ. संजय सिन्हा का भी तुरंत प्रभाव से ट्रांसफर कर पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट से अटैच कर दिया गया।

