प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई नीति आयोग की बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने राष्ट्रीय राजधानी के विकास को लेकर अपना विस्तृत विजन प्रस्तुत किया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि “विकसित भारत-2047” के लक्ष्य को हासिल करने में दिल्ली की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति से नहीं होती, बल्कि नागरिकों की क्षमता, कौशल और उत्पादकता भी उतनी ही अहम होती है। रेखा गुप्ता ने बैठक में दिल्ली को एक मॉडल शहर के रूप में विकसित करने और नागरिक-केंद्रित नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राजधानी को विकास के ऐसे मानक स्थापित करने होंगे, जिन्हें देश के अन्य राज्य भी अपनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान केवल आर्थिक या तकनीकी विकास से नहीं होती, बल्कि उसके नागरिकों की क्षमता, कौशल और उत्पादकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली देश के परिवर्तन को गति देने वाला एक सशक्त इंजन बनकर उभरी है और आगे भी यह भूमिका और मजबूत होगी। रेखा गुप्ता ने बैठक में दिल्ली सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में चलाई जा रही योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजधानी को “विकसित दिल्ली” के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार लगातार गंभीर और लक्षित प्रयास कर रही है।

दिल्ली में 1 लाख करोड़ रुपये का ‘रोड इंफ्रास्ट्रक्चर’

प्रधानमंत्री के सफल और गौरवशाली 12 वर्ष पूरे होने पर राजधानी की जनता की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। बयान में यह भी कहा गया कि राजनीतिक परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, लेकिन केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री सदैव दिल्ली के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए सहयोगी रहे हैं। इसी क्रम में यह जानकारी साझा की गई कि केंद्र सरकार की सहायता से दिल्ली में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के विशाल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसे राजधानी की कनेक्टिविटी और शहरी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया गया है। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण पहल का उल्लेख करते हुए बताया गया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के तहत पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर एक विशेष कोऑर्डिनेशन टीम का गठन किया गया है। यह टीम राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर यमुना नदी के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में समन्वित रूप से काम शुरू कर चुकी है।

अफसरों की लगातार ट्रेनिंग

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसके तहत कक्षा 9वीं में होने वाले ड्रॉपआउट को कम करने के उद्देश्य से छात्राओं को मुफ्त साइकिल उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना को विशेष रूप से बालिकाओं की स्कूल उपस्थिति बढ़ाने और शिक्षा को निरंतर बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम बताया गया है। प्रशासनिक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार में अब पूरी तरह से ई-फाइल प्रणाली लागू हो चुकी है, जिससे सरकारी कामकाज अधिक तेज और पारदर्शी हुआ है। इसके साथ ही नए कंट्रोल एंड कमांड सेंटर स्थापित किए गए हैं, जो विभिन्न विभागीय गतिविधियों की निगरानी और समन्वय को बेहतर बनाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की पहल ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत दिल्ली के अधिकारियों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक क्षमता और सेवा दक्षता में सुधार हो सके। परिवहन क्षेत्र में आधुनिकता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच हेतु तीन नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना तैयार की है। इन स्टेशनों के शुरू होने से वाहन फिटनेस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक-संचालित हो जाएगी।

दिल्ली सरकार ने 75 ‘सीएम श्री स्कूल’ स्थापित किए

उन्होंने कहा कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप एक बड़े परिवर्तन से गुजर रही है। सरकार मिशन मोड में स्कूलों के बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान दिल्ली सरकार ने 75 ‘सीएम श्री स्कूल’ स्थापित किए हैं, जिन्हें आधुनिक शिक्षा और उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में अब तक 8,777 से अधिक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा पिछले एक वर्ष में 125 डिजिटल लाइब्रेरी, 175 कंप्यूटर प्रयोगशालाएं और 125 भाषा प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिससे छात्रों को आधुनिक और तकनीक-आधारित शिक्षण वातावरण मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष से मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और छात्रों के लिए व्यक्तिगत शिक्षण मार्ग (पर्सनलाइज्ड लर्निंग पाथ) विकसित करने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शिक्षा व्यवस्था में एकीकृत करने की नई योजना शुरू की गई है।

ITI में 9 उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना

मुख्यमंत्री के अनुसार, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए दिल्ली के विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में 9 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में औद्योगिक स्वचालन, रोबोटिक वेल्डिंग, सेमीकंडक्टर तकनीक और स्मार्ट एनर्जी जैसे आधुनिक और उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे युवाओं को भविष्य की मांग के अनुरूप कौशल प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार प्रधानमंत्री विश्वकर्मा और पीएम सेतु जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं को सक्रिय रूप से लागू कर रही है, ताकि पारंपरिक कारीगरों और तकनीकी कौशल वाले युवाओं को बेहतर अवसर और सहायता मिल सके। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के प्रमुख तकनीकी और शोध संस्थान जैसे DTU, NSUT और IIITD विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर संयुक्त अनुसंधान और अकादमिक सहयोग में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहे हैं।

अस्पतालों में मुफ्त MRI और CT स्कैन

स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अस्पतालों के उन्नयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। इसी दिशा में द्वारका में दिल्ली का पहला ‘ब्रेन हेल्थ क्लिनिक’ स्थापित किया गया है, जो न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है, जिससे मरीजों को महंगी जांचों का लाभ बिना अतिरिक्त खर्च के मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजधानी में 150 डायलिसिस केंद्र पहले से संचालित हैं, जो किडनी रोगियों को नियमित उपचार उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से दिल्ली में अब तक 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिर शुरू किए जा चुके हैं और चालू वर्ष में 750 अतिरिक्त केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

दिल्ली में खेलो इंडिया केंद्र 5 से बढ़ाकर 11 किए

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री खेल प्रोत्साहन योजना’ के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए सहयोग तथा सरकारी नौकरी के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए खेलो इंडिया केंद्रों की संख्या 5 से बढ़ाकर 11 कर दी गई है। इसके साथ ही खिलाड़ियों की चोटों के उपचार और प्रदर्शन सुधार के लिए एक आधुनिक खेल पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, ‘दिल्ली खेल महाकुंभ 2025-26’ देश के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक बनकर उभरा है, जिसमें 25,000 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ युवाओं में खेल संस्कृति को भी बढ़ावा दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा महाकुंभ, नमो विद्या उत्सव और नमो रन जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस, सकारात्मक सोच और सामाजिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया है।

रेखा गुप्ता ने दिल्ली के लिए अधिक केंद्रीय सहायता मांगी

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नीति आयोग की बैठक में केंद्र सरकार से दिल्ली को मिलने वाली केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली को वित्त आयोग के माध्यम से करों में कोई हिस्सेदारी या अनुदान प्राप्त नहीं होता, इसलिए राजधानी को दी जाने वाली केंद्रीय सहायता का स्तर अन्य राज्यों को मिलने वाले आवंटन के अनुरूप किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने दिल्ली के विकास को और गति देने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय प्रस्ताव भी रखे। उन्होंने अनुरोध किया कि वर्ष 2025 से दिल्ली सरकार का ‘पब्लिक अकाउंट’ अलग होने के कारण उसमें उपलब्ध शेष राशि का मिलान कर उसे जल्द जारी किया जाए, ताकि विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों में वित्तीय बाधाएं न आएं।

बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े कार्यों में तेजी लाने और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली के PWD इंजीनियरिंग कैडर को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) से पूरी तरह अलग करने का प्रस्ताव भी रखा। उनका मानना है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार की विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली महत्वाकांक्षी योजना में दिल्ली को भी शामिल करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद दिल्ली की परिस्थितियां विशिष्ट हैं और यहां नई तकनीकों, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों तथा प्रदूषण-मुक्त विनिर्माण इकाइयों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इसलिए राष्ट्रीय औद्योगिक विकास योजनाओं में दिल्ली को भी विशेष रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m