दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए इमारत हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) एक्शन मोड में आ गया है। हादसे के बाद अब MCD ने ढही हुई इमारत से बिल्कुल सटी दूसरी बहुमंजिला बिल्डिंग को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी के मद्देनजर MCD की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और ढही हुई इमारत से सटी बहुमंजिला इमारत को भी सुरक्षा के लिहाज से हटाने की प्रक्रिया शुरू की है।

असुरक्षित घोषित की गई थी सटी हुई इमारत

MCD के मुताबिक, हादसे के बाद ढही हुई इमारत से सटी इस बहुमंजिला बिल्डिंग को असुरक्षित और खतरनाक घोषित किया गया था। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इमारत को गिराने का काम शुरू कर दिया गया है। शाम को काम रोक दिया गया था, जिसे अगली सुबह दोबारा शुरू किया जाएगा। अधिकारी के अनुसार, बिल्डिंग को विशेषज्ञों की निगरानी में ध्वस्त किया जा रहा है। अचानक इमारत के गिरने के खतरे को देखते हुए उसके चारों तरफ लोहे के सपोर्ट लगाए गए हैं, ताकि डिमोलिशन की प्रक्रिया के दौरान आसपास की इमारतों और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

लड़कियों का PG चल रहा था

बताया जा रहा है कि इस इमारत में लड़कियों का PG संचालित हो रहा था। रविवार को हुए इमारत हादसे के तुरंत बाद इसे खाली करा लिया गया था। इसके बाद MCD ने मकान नंबर 13 के मालिक और वहां रहने वाले लोगों को इमारत ध्वस्त करने का आदेश जारी किया। निगम के मुताबिक, इमारत की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसे हटाना जरूरी था, क्योंकि इससे आसपास की इमारतों के साथ-साथ लोगों की जान को भी खतरा बना हुआ था। डिमोलिशन की कार्रवाई शुरू करने से पहले PG में रहने वाले छात्रों से उनका बचा हुआ सामान निकालने को कहा गया था।

दो दिनों में 1,100 PG का सर्वे, 24 संपत्तियों पर चला बुलडोजर

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने राजधानी के PG आवासों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। पिछले दो दिनों में MCD की टीमों ने दिल्ली के सभी 12 जोनों में करीब 1,100 PG संपत्तियों का सर्वे किया। इन संपत्तियों में लगभग 20,250 छात्र रह रहे हैं। सर्वे के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की गई। MCD के मुताबिक, 24 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया, जबकि 27 अन्य संपत्तियों को गिराने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा 7 संपत्तियों को पूरी तरह सील किया गया है।

निगम ने 35 संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। वहीं, सीलिंग कार्रवाई से संबंधित 6 अन्य कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। MCD का यह अभियान उन इमारतों पर केंद्रित है, जहां सुरक्षा मानकों और भवन संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया गया है। MCD की कार्रवाई दिल्ली के प्रमुख स्टूडेंट हब्स में की गई है। इनमें लक्ष्मी नगर, मुखर्जी नगर, जामिया नगर, शाहीन बाग, करोल बाग, चांदनी चौक और नेहरू विहार जैसे इलाके शामिल हैं।

पूरी दिल्ली के PG की होगी मैपिंग

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने राजधानी में संचालित सभी PG की सुरक्षा जांच को लेकर बड़ा कदम उठाया है। MCD कमिश्नर ने दिल्ली के हर PG की मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारतें सुरक्षा मानकों और भवन निर्माण से जुड़े नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं। मैपिंग के दौरान इमारतों की स्थिति और उनमें किए गए निर्माण की भी जांच की जाएगी। खासतौर पर अवैध पांचवीं मंजिल के निर्माण को लेकर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी निर्माणाधीन इमारत में बिना अनुमति पांचवीं मंजिल का निर्माण किया जा रहा है, तो उसे तुरंत ध्वस्त कर दिया जाएगा। वहीं, जिन मौजूदा इमारतों में पहले से पांचवीं मंजिल बनी हुई है, उनका भी सर्वे कराया जाएगा।

52 PG खस्ताहाल मिले

दिल्ली में PG आवासों की जांच के दौरान नगर निगम को 52 PG खस्ताहाल हालत में मिले हैं। निगम ने इन संपत्तियों के मालिकों को जरूरी मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। MCD के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजधानी के सभी 12 जोन में टीमें सर्वे कर रही हैं। खासतौर पर शैक्षणिक संस्थानों के आसपास स्थित PG और अन्य इमारतों की जांच की जा रही है। निगम का दावा है कि पिछले दो दिनों में अवैध या जर्जर हालत के कारण 48 इमारतों को ढहाया गया, जबकि 15 संपत्तियों को सील किया गया है। सर्वे के दौरान नियमों का उल्लंघन और सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर संबंधित संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

जोखिम के आधार पर होगी जर्जर भवनों की पहचान

MCD ने सभी जोनल उपायुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में खतरनाक और जर्जर इमारतों की पहचान कर उन्हें जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत ऐसी इमारतों को चिन्हित किया जाएगा, जिनसे लोगों की सुरक्षा को तत्काल या संभावित खतरा है। जिन भवनों से तत्काल खतरा पैदा होने की आशंका होगी, वहां स्थिति के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। निगम का फोकस खासतौर पर उन इमारतों पर है, जिनका इस्तेमाल PG या छात्रों के आवास के तौर पर हो रहा है।

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