दिल्ली के सत्य निकेतन में हाल ही में हुई बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद सरकार ने पेइंग गेस्ट (PG) में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र PG में रहकर पढ़ाई करते हैं, लेकिन कई जगहों पर मनमाना किराया, सुरक्षा की कमी, खराब सुविधाएं और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। इन समस्याओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ‘पेइंग गेस्ट एकोमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल’ लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के जरिए PG संचालकों की मनमानी पर लगाम लगाने के साथ-साथ वहां रहने वाले छात्रों के अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।

हर PG का रजिस्ट्रेशन और सरकारी लाइसेंस होगा जरूरी

प्रस्तावित नए नियम लागू होने के बाद दिल्ली में संचालित हर पेइंग गेस्ट (PG) का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो सकता है। PG संचालकों को सरकार से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए पुलिस, नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक विभागों की जांच और जरूरी मंजूरी के बाद ही PG संचालित करने की अनुमति मिलेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक PG को एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा। इससे संबंधित PG की पहचान और उसकी वैधता आसानी से जांची जा सकेगी। इसके अलावा, रजिस्टर्ड PG की जानकारी सरकार के GovPG पोर्टल पर उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों को PG की जानकारी लेने में आसानी होगी और वे यह पता कर सकेंगे कि जिस PG में वे रह रहे हैं या रहने की योजना बना रहे हैं, वह नियमों के तहत रजिस्टर्ड है या नहीं।

किराए की मनमानी पर लगेगी रोक

प्रस्तावित नए नियमों में PG में रहने वाले छात्रों से मनमाना किराया वसूलने पर रोक लगाने की भी तैयारी है। इसके लिए अलग-अलग इलाकों के हिसाब से PG के किराए की एक तय सीमा यानी ‘Rent Band’ निर्धारित की जाएगी। इस सीमा से अधिक किराया वसूलने के लिए PG संचालक को विशेष अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट को अधिकतम तीन महीने के किराए तक सीमित रखने का प्रस्ताव है। PG छोड़ने के बाद संचालक को छात्र की सिक्योरिटी डिपॉजिट 30 दिन के भीतर वापस करनी होगी। नए नियमों के तहत PG संचालक किसी छात्र को बिना उचित कारण अचानक बाहर नहीं निकाल सकेगा। सामान्य परिस्थितियों में छात्र को PG खाली करने के लिए कम से कम 30 दिन का लिखित नोटिस देना होगा।

CCTV और सुरक्षा व्यवस्था होगी अनिवार्य

छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए PG के सभी प्रवेश और निकास द्वार के साथ-साथ कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी, ताकि किसी घटना की स्थिति में फुटेज की जांच की जा सके। इसके अलावा जिन PG में 15 या उससे अधिक छात्र रहेंगे, वहां सुरक्षा गार्ड रखना अनिवार्य होगा। ऐसे PG में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाइसेंस प्राप्त सिक्योरिटी गार्ड की तैनाती करनी होगी।

बाहर से आने वालों की एंट्री का भी तय होगा समय

प्रस्तावित नियमों में PG में बाहरी लोगों के आने-जाने को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की जाएगी। बाहरी विजिटर्स को सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक ही PG में प्रवेश की अनुमति होगी। हर विजिटर की एंट्री अनिवार्य रूप से रजिस्टर में दर्ज करनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर PG में आने-जाने वाले लोगों की जानकारी उपलब्ध रहे। हर PG में एक वार्डन की व्यवस्था भी करनी होगी। वार्डन को PG से अधिकतम 500 मीटर के दायरे में रहना या अपना कार्यालय रखना होगा। साथ ही आपात स्थिति में वार्डन के 15 मिनट के भीतर PG पहुंचने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

ऑनलाइन दर्ज हो सकेगी छात्रों की शिकायत

प्रस्तावित GovPG पोर्टल पर छात्र PG से जुड़ी जरूरी जानकारी देख सकेंगे। इसी पोर्टल के जरिए वे PG संचालक के खिलाफ अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी स्थिति को भी ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। छात्रों की सुरक्षा और शिकायतों को लेकर एक अहम प्रावधान यह भी है कि जरूरत पड़ने पर गुमनाम शिकायत दर्ज करने की सुविधा देने का प्रस्ताव है। इससे छात्र बिना अपनी पहचान सार्वजनिक किए समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे।

कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बनेगी एकोमोडेशन कमेटी

PG व्यवस्था की निगरानी के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विशेष एकोमोडेशन कमेटी बनाने का भी प्रस्ताव है। इस कमेटी में फैकल्टी सदस्यों के साथ छात्र प्रतिनिधि, NSS/NCC, नगर निगम और पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे।कमेटी का काम PG का निरीक्षण करना और यह देखना होगा कि संचालक निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कमेटी संबंधित PG संचालक को नोटिस जारी कर सकेगी। इसके अलावा छात्र और PG मालिक के बीच विवाद होने पर उसे 15 दिन के भीतर सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।  प्रस्तावित व्यवस्था सिर्फ कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगी। कोचिंग सेंटर और स्किल ट्रेनिंग संस्थानों के लिए भी इसी तरह की एकोमोडेशन कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

छात्रों के लिए और क्या राहत?

प्रस्तावित बिल में छात्रों को आर्थिक रूप से राहत देने के लिए भी कई प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। इसके तहत PG मालिक बिना रसीद के किराया या सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकेंगे। साथ ही छात्रों से तीन महीने से अधिक का एडवांस किराया मांगने पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। PG संचालक मनमाने तरीके से बिजली या अन्य सेवाओं के नाम पर अतिरिक्त शुल्क भी नहीं वसूल सकेंगे। इसके अलावा जाति, धर्म, लिंग या राज्य के आधार पर अलग-अलग किराया वसूलने की अनुमति नहीं होगी। इससे छात्रों के साथ भेदभाव और अतिरिक्त शुल्क वसूली पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।

नियमों का पालन करने वाले PG को मिलेगा फायदा

सरकार की ओर से सिर्फ नियमों को सख्ती से लागू करने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि नियमों का लगातार पालन करने वाले PG संचालकों को प्रोत्साहित करने का भी प्रस्ताव है। जो PG लगातार दो साल तक अच्छे रिकॉर्ड के साथ नियमों का पालन करेंगे, उन्हें ‘सर्टिफाइड स्टूडेंट-फ्रेंडली PG’ का दर्जा दिया जा सकता है। ऐसे PG को सरकारी पोर्टल पर प्राथमिकता देने और संभावित प्रॉपर्टी टैक्स में राहत जैसे प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा PG में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने और रेनोवेशन कराने के लिए आसान लोन की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी विचार किया गया है।

छोटे PG के रजिस्ट्रेशन को लेकर चुनौती

प्रस्ताव में यह भी माना गया है कि दिल्ली में चल रहे हजारों छोटे और अनौपचारिक PG को एक साथ रजिस्टर कराना आसान नहीं होगा। इसके अलावा सरकारी पोर्टल के संचालन, अलग-अलग विभागों से NOC लेने और PG के लिए उचित किराया तय करने जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम, चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई और एक समर्पित अधिकारी की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है। इससे PG संचालकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है।

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