मेरठ. देश की सैन्य सुरक्षा और भविष्य की आधुनिक युद्ध जरूरतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक बड़ी रक्षा परियोजना आकार लेने जा रही है. छावनी क्षेत्र के किला रोड स्थित मिलिट्री फार्म की करीब 900 एकड़ जमीन पर देश का पहला समर्पित मानव रहित विमान (UAV) और ड्रोन रनवे विकसित किया जाएगा. सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 371.15 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी कर दिया है.

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यह परियोजना प्रोजेक्ट शिवालिक के तहत विकसित की जा रही है. इससे पहले करीब 406 करोड़ रुपये की लागत से टेंडर जारी किया गया था, लेकिन प्रक्रिया में बदलाव के बाद संशोधित लागत के साथ BRO के अतिरिक्त महानिदेशक (उत्तर-पश्चिम), चंडीगढ़ कार्यालय ने नया टेंडर जारी किया है. इच्छुक एजेंसियां 25 सितंबर तक निविदा(Tender) जमा कर सकेंगी, जबकि 26 सितंबर को टेंडर खोला जाएगा.

सात महीने में तैयार होगी परियोजना की डीपीआर

टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित कार्यदायी संस्था को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने के लिए सात महीने का समय दिया जाएगा. डीपीआर को सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा. परियोजना को भारत की भविष्य की सैन्य और ड्रोन रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

2110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा होगा रनवे

प्रस्तावित रनवे करीब 2110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा होगा. इसके अलावा विमानों और मानव रहित विमानों को सुरक्षित रखने के लिए दो बड़े हैंगर बनाने की योजना है. प्रत्येक हैंगर करीब 60 मीटर चौड़ा और 50 मीटर लंबा होगा.

C-295 और C-130 जैसे विमान भी उतर सकेंगे

परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ ड्रोन तक सीमित नहीं होगी. यहां रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के साथ परिवहन विमानों के संचालन की क्षमता भी विकसित की जाएगी. योजना के अनुसार C-295 और C-130 जैसे सैन्य परिवहन विमान भी इस रनवे पर उतर सकेंगे. इससे सैन्य उपकरण, सामग्री और जरूरी संसाधनों की तेज आवाजाही में मदद मिल सकती है.

ड्रोन ट्रेनिंग और परीक्षण का बनेगा बड़ा केंद्र

आधुनिक युद्ध प्रणाली में ड्रोन और UAV की भूमिका तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में मेरठ का यह केंद्र ड्रोन संचालन, परीक्षण, निगरानी और प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में विकसित हो सकता है. यहां रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के सैन्य अभ्यास और अन्य तकनीकी परीक्षणों की सुविधाएं भी विकसित किए जाने की संभावना है.

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आपदा के समय भी मिलेगी बड़ी मदद

इस रनवे का इस्तेमाल केवल सैन्य जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा. बाढ़, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ड्रोन से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी, राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव अभियान चलाने में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा. दूरदराज के इलाकों तक जरूरी दवाएं और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में भी मानव रहित विमानों की मदद ली जा सकती है.