चंडीगढ़: हरियाणा में दूध की कीमतों को लेकर पशुपालकों ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के कई गांवों में पशुपालकों ने एक सितंबर से दूध के दाम बढ़ाकर ₹100 प्रति लीटर तक करने का ऐलान किया है। कुछ गांवों में गाय के दूध की कीमत ₹80 प्रति लीटर तय करने की बात कही गई है। वहीं, देसी घी का भाव भी ₹1500 से ₹2000 प्रति किलो तक करने का फैसला लिया गया है। खास बात यह है कि जींद के सिरसा खेड़ी गांव में तय कीमत से कम पर दूध बेचने वाले पशुपालक पर ₹5100 का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया है।
राजथल गांव से शुरू हुई मुहिम
दूध के दाम बढ़ाने की यह मुहिम हिसार के राजथल गांव से शुरू हुई। यहां पशुपालकों ने भैंस का दूध ₹100 और गाय का दूध ₹80 प्रति लीटर बेचने का निर्णय लिया। इसके साथ ही देसी घी की कीमत ₹1500 से ₹2000 प्रति किलो रखने की बात कही गई।
इसके बाद हांसी, कुरुक्षेत्र, कैथल और जींद के कई गांवों में भी पशुपालकों ने बैठकें कर दूध की कीमत बढ़ाने पर चर्चा की और अपने-अपने स्तर पर फैसले लिए।
कहीं एक सितंबर तो कहीं चार सितंबर से नए रेट
हांसी क्षेत्र के राजथल, भैणीअमीपुर और मिर्चपुर गांवों में पशुपालकों ने मौजूदा कीमतों में ₹20 से ₹30 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की मांग की है। राजथल में चार सितंबर से भैंस का दूध ₹100 और गाय का दूध ₹80 प्रति लीटर करने की बात कही गई है।
कैथल के धनौरी गांव में पशुपालकों ने एक सितंबर से दूध ₹100 प्रति लीटर बेचने का फैसला लिया है। वहीं जींद की जुलाना तहसील के सिरसा खेड़ी गांव में भी एक सितंबर से ₹100 प्रति लीटर की दर लागू करने की बात कही गई है।
कम कीमत पर दूध बेचने पर ₹5100 का दंड
सिरसा खेड़ी में पशुपालकों ने कीमत को लेकर सख्ती का भी फैसला किया है। बैठक में तय किया गया कि यदि कोई पशुपालक निर्धारित दर से कम कीमत पर दूध बेचता है तो उस पर ₹5100 का जुर्माना लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य सभी पशुपालकों के लिए एक समान बिक्री दर बनाए रखना बताया गया है।
पिहोवा में 10 सितंबर को महापंचायत
कुरुक्षेत्र के पिहोवा में भी दूध के दाम बढ़ाने को लेकर पशुपालकों और किसानों की बैठक हुई। यहां 10 सितंबर को बड़ी महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया गया है। महापंचायत में दूध की नई कीमत को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बढ़ती लागत को बताया वजह
पशुपालकों का कहना है कि पशुओं को पालने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। खल, बिनौला, तूड़ी, हरा चारा और पशु आहार की कीमतों में बढ़ोतरी से दूध उत्पादन की लागत पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। इसके अलावा ईंधन महंगा होने से दूध की ढुलाई और पशुओं की देखभाल का खर्च भी बढ़ा है।
इसी बीच डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन (DFA) ने भी वीटा के अलग-अलग प्लांटों को ज्ञापन सौंपकर दूध खरीद के दाम में ₹2 से ₹3 प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की है। एसोसिएशन का तर्क है कि बढ़ती लागत के अनुरूप किसानों को दूध का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
दूध महंगा हुआ तो इन चीजों पर भी पड़ेगा असर
अगर दूध के दाम बढ़ते हैं तो इसका असर केवल ग्राहकों के दूध के बजट तक सीमित नहीं रहेगा। दूध से बनने वाले दही, पनीर, घी और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। त्योहारों का सीजन नजदीक होने के कारण मिठाई, बेकरी और खान-पान से जुड़े कारोबारियों की लागत भी बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, अभी यह फैसला पूरे प्रदेश में एक समान रूप से लागू नहीं हुआ है। अलग-अलग गांवों के पशुपालकों ने अपने स्तर पर कीमतों को लेकर निर्णय लिए हैं और कुछ स्थानों पर अंतिम फैसला महापंचायत के जरिए होना बाकी है।
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