विकास कुमार/ सहरसा। मिथिला के ‘ब्लैक डायमंड’ कहे जाने वाले मखाने को अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने वाली है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड स्थित मुरादपुर पंचायत में ‘हाउस ऑफ मिथिला’ की एक अत्याधुनिक मखाना उत्पादन इकाई का विधिवत उद्घाटन किया गया। यह पहल न केवल स्थानीय किसानों के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि मखाना उद्योग में एक क्रांतिकारी बदलाव की नींव भी रखेगी।




किसानों के हाथों हुआ शुभारंभ
इस विशेष इकाई का उद्घाटन किसी बड़े नेता या अधिकारी के बजाय स्वयं स्थानीय किसानों के कर-कमलों द्वारा किया गया। यह कदम इस संस्था की संवेदनशीलता और किसानों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उद्घाटन समारोह में 100 से अधिक किसान, ऊर्जावान युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्ध जन शामिल हुए। आधुनिक मशीनों के सफल ट्रायल रन के बाद, यहां नैवेद्यम ब्रांड के बैनर तले मखाना उत्पादों का नियमित व्यावसायिक उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया गया है।
दूरदर्शी लक्ष्य और आर्थिक सशक्तिकरण
हाउस ऑफ मिथिला का प्राथमिक उद्देश्य मिथिला की इस पारंपरिक उपज को केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। इस पहल के पीछे तीन प्रमुख स्तंभ हैं:
- उचित मूल्य: बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर किसानों को उनकी मेहनत का सीधा और बेहतर मुनाफा दिलाना।
- रोजगार सृजन: उत्पादन इकाई के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना।
- गुणवत्ता और प्रसंस्करण: आधुनिक तकनीक का उपयोग करके मखाने को उच्च गुणवत्ता के साथ वैल्यू-एडेड उत्पादों में बदलना।
स्थानीय स्तर पर उम्मीदों का संचार
इस पहल से मुरादपुर सहित पूरे सहरसा क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। किसानों का मानना है कि यह उद्योग क्षेत्र की सुस्त पड़ी आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार देगा। स्थानीय ग्रामीणों ने इसे अपने गौरव और आजीविका के लिए एक ऐतिहासिक कदम करार दिया है।
संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि ‘नैवेद्यम’ ब्रांड के माध्यम से वे शुद्धता और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को पूरा करेंगे, जिससे मिथिला के मखाने की मांग वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ेगी। यह परियोजना न केवल मखाना उत्पादन को संगठित करेगी, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों के लिए एक मॉडल के रूप में भी उभरेगी।

