कर्नाटक की राजनीति में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला. सोमवार को कांग्रेस आलाकमान ने डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट के विस्तार को मंत्रियों के नामों को लेकर हरी झंडी तो दे दी, लेकिन मंत्रियों की सामने आई नई लिस्ट से उन विधायकों में मायूसी नजर आयी, जिन्होंने कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद लगा रखी थी. इस कड़ी में कांग्रेस के दो विधायकों ने इस्तीफा भी दे दिया.

CM डीके शिवकुमार का मची सियासी हलचल के बीच बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने साफ किया कि सभी विधायकों को एकसाथ कैबिनेट में शामिल नहीं किया जा सकता है.

कैबिनेट विस्तार में जगह न मिलने से कांग्रेस के दो विधायकों ने नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह से पहले विधानसभा से इस्तीफा दे दिया. इंडी के विधायक यशवंतरायगौडा वी. पाटिल और सागर के विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने अपने-अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया.

CM डीके शिवकुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार पर पत्रकारों से बात करते हुए याद दिलाया कि इससे पहले उन्हें भी सिद्धारमैया मंत्रिमंडल में मंत्री पद नहीं मिला था. जिन विधायकों को मंत्री पद नहीं मिला है, भविष्य में उनको मौका मिलेगा. इस्तीफे ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर दबाव बढ़ा दिया है. आने वाले दिनों में और असंतुष्ट विधायकों के मुखर होने की आशंका के बीच पार्टी नेता नुकसान की भरपाई करने में जुट गये हैं.

CM शिवकुमार ने कहा कि 34 सदस्यीय राज्य कैबिनेट में केवल 20 सीटें ही खाली थीं, जिन्हें क्षेत्रीय, जातिगत और गुटीय संतुलन के आधार पर भरा गया है. सभी वरिष्ठों को एक साथ मंत्री बनाना संभव नहीं था. हम भविष्य में भी सबको अवसर देंगे.

हालांकि, इस्तीफा दिए हुए विधायकों ने कांग्रेस पर विश्वासघात करने का आरोप भी लगाया है. उन्होंने पार्टी में भाई-भतीजावाद और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाया. वहीं, पत्रकारों से बात करते हुए यशवंतरायगौडा वी. पाटिल ने कहा कि आज सुबह तक उनका नाम लिस्ट में था और उन्हें इसकी सूचना भी मिली थी, लेकिन पार्टी की ओर से जारी अंतिम लिस्ट में उनका नाम नहीं था.

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