भुवनेश्वर: संसद द्वारा पारित ‘खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ (MMDR Amendment Bill, 2026) को लेकर ओडिशा में राजनीति गरमा गई है। बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष और ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने राज्य के सभी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसदों को पत्र लिखकर इस कानून का विरोध करने और अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। पटनायक का आरोप है कि यह कानून लंबे समय में ओडिशा के आर्थिक और प्रशासनिक हितों के लिए बेहद हानिकारक साबित होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 13 अगस्त को लोकसभा में यह बिल पारित होने वाले दिन को ओडिशा के लिए ‘काला दिवस’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ओडिशा के हितों से सीधे जुड़े इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में 10 मिनट से भी कम समय चर्चा हुई। इतने कम समय में इसे पारित कर देना दिखाता है कि कानून निर्माण प्रक्रिया में ओडिशा की चिंताओं और आशंकाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है।
देश के कुल खनिज संसाधनों का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा ओडिशा में है। दशकों से ओडिशा के खनिज संसाधनों ने भारत के इस्पात, बिजली, खनन और बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पटनायक ने दावा किया कि इस संशोधित कानून के कारण ओडिशा को प्रतिवर्ष लगभग 12,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है, जो समय के साथ बढ़कर लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।

बीजेडी प्रमुख ने कहा कि वित्तीय नुकसान से भी बड़ा मुद्दा राज्य के खनिज संसाधनों और खनिज-समृद्ध भूमि पर राज्य सरकार के नियंत्रण और अधिकारों में कटौती होना है। खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्रदूषण, विस्थापन और पर्यावरण क्षरण का दंश झेलते हैं, ऐसे में राज्य के संसाधनों पर स्थानीय लोगों का पहला अधिकार होना चाहिए। यह संशोधन राज्य के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ अन्याय है।
बीजेपी सांसदों को संबोधित करते हुए नवीन पटनायक ने कहा, “इतिहास आपको इस बात से याद नहीं रखेगा कि आप किस पार्टी के साथ खड़े थे, बल्कि इस बात से याद रखेगा कि जब ओडिशा को आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आप राज्य के लिए खड़े हुए या नहीं।” उन्होंने सांसदों से पार्टी लाइन से ऊपर उठकर ओडिशा के स्वाभिमान, अधिकारों और विकास के लिए आवाज उठाने और इस संशोधन को वापस लेने की मांग करने की अपील की है।

