प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर। महाराष्ट्र और बस्तर की सीमा से लगे औंधी क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत है। पिछले करीब एक सप्ताह से गट्टेपायली, घोटियाकन्हार और गट्टेपायली इलाके में अलग-अलग समय पर ग्रामीणों ने बाघ को देखने की बात कही है। गट्टेपायली गांव के पास मुख्य सड़क किनारे बाघ के पगमार्क भी मिले हैं। इसके बाद वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ाने के साथ संभावित विचरण क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए हैं।

बता दें कि मौजुदा स्थिति को देखते हुए वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रवीण देहारी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम दिन और रात लगातार गश्त कर रही है। टीम गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें सावधानी बरतने की समझाइश भी दे रही है।

Lalluram.com की टीम ने ग्राउंड पर जाना हाल

बाघ की दहशत के बीच ग्रामीणों की स्थिति और वन विभाग के सुरक्षा इंतजामों की जमीनी हकीकत जानने लल्लूराम डॉट कॉम की टीम भी वन विभाग के गश्त अभियान का हिस्सा बनी। टीम दिन के साथ देर रात तक महाराष्ट्र सीमा से लगे गांवों में पहुंची। इस दौरान गट्टेपायली, घोटियाकन्हार, गट्टेपायली, नवागांव और आसपास के इलाकों में ग्रामीणों से मुलाकात कर बाघ की मौजूदगी के बाद बने हालात की जानकारी ली।

ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के डर के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। खेतों में जाना हो या गांव से बाहर निकलना, हर समय बाघ के सामने आने की आशंका बनी रहती है। बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर भी अभिभावक चिंतित हैं। कई बच्चे डर के कारण स्कूल नहीं जा रहे हैं।

लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने इस दौरान वन विभाग की टीम के साथ क्षेत्र में दिन-रात चल रही गश्त को भी करीब से देखा। रेंजर प्रवीण देहारी से चर्चा कर बाघ की निगरानी, ग्रामीणों की सुरक्षा और विभाग की ओर से किए जा रहे सुरक्षात्मक उपायों की जानकारी ली।

आसपास के गांवों से स्कूल नहीं पहुंच रहें बच्चे

बाघ की मौजूदगी का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। खेती-किसानी के इस मौसम में किसान डर के बीच खेतों में जा रहे हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावक चिंतित हैं। बाघ के डर से आसपास के गांवों से बागडोंगरी माध्यमिक शाला आने वाले कई बच्चे पिछले कुछ दिनों से स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं।

बागडोंगरी माध्यमिक शाला पहुंचकर वन अमले ने शिक्षकों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा की। रेंजर ने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों के पालकों से चर्चा कर स्कूल आने-जाने के लिए सुरक्षित व्यवस्था बनाने का प्रयास करें। इसमें वन विभाग भी सहयोग करेगा।

अकेले खेत-जंगल जाने से बचने की सलाह

घोटियाकन्हार और गट्टेपायली में ग्रामीणों के साथ बैठक कर वन विभाग ने उन्हें बाघ से सुरक्षा के उपाय बताए। ग्रामीणों से अकेले आने-जाने से बचने और खेतों में संभव हो तो समूह में जाने की अपील की गई। बाघ दिखाई देने पर उसके पास नहीं जाने और तत्काल वन विभाग को सूचना देने कहा गया।

वन अमले ने देर रात तक महाराष्ट्र सीमा से लगे नवागांव, घोटियाकन्हार सहित अन्य गांवों में गश्त की और ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें सतर्क किया।

रेंजर बोले- बाघ जंगल में ही है, ग्रामीण रहें सतर्क

रेंजर प्रवीण देहारी ने क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा कि बाघ अपने प्राकृतिक आवास जंगल में ही है। क्षेत्र जंगल से घिरा होने के कारण कभी-कभी बाघ ग्रामीण इलाकों की ओर आ सकता है। वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ स्थिति पर नजर रख रही है और हालात काफी हद तक नियंत्रण में हैं।

ट्रैप कैमरा

उन्होंने बताया कि बाघ के संभावित विचरण वाले इलाकों में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इनके जरिए बाघ की लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से वन विभाग का सहयोग करने और अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।

महाराष्ट्र में दो ग्रामीणों की जान ले चुका है बाघ

औंधी और आसपास का इलाका पिछले करीब दो वर्षों से बाघ की आवाजाही से प्रभावित है। महाराष्ट्र सीमा के उस पार हाल ही में दोलेंदा गांव में बाघ ने एक ग्रामीण पर हमला कर उसकी जान ले ली थी। इससे करीब 7-8 महीने पहले महाराष्ट्र के मुरुमगांव क्षेत्र में भी बाघ के हमले में एक ग्रामीण की मौत हुई थी।

वहीं सीमा के इस पार औंधी और सीतागांव क्षेत्र के निडेली, बागडोंगरी, पिट्टेमेटा समेत कई गांवों में पिछले दो वर्षों के दौरान बाघ पालतू मवेशियों का शिकार कर चुका है। पुरानी घटनाओं के कारण अब दोबारा बाघ की मौजूदगी सामने आने से ग्रामीणों में किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है।

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