Monsoon health tips for pregnant women: मानसून का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है, लेकिन बारिश के दिनों में गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है। इस मौसम में नमी बढ़ने के कारण वायरल इंफेक्शन, दूषित पानी से होने वाली बीमारियों, फूड इंफेक्शन और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इम्यून सिस्टम में भी परिवर्तन आता है। ऐसे में संक्रमण से बचाव के साथ मां और गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक, रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर मानसून के दौरान कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

आइए जानते हैं बारिश के मौसम में गर्भवती महिलाओं को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. साफ और सुरक्षित पानी ही पिएं
मानसून के दौरान पानी के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे पेट और आंतों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं को कोशिश करनी चाहिए कि वे केवल साफ, फिल्टर किया हुआ या अच्छी तरह उबला हुआ पानी ही पिएं।
बाहर मिलने वाले खुले पानी, बर्फ और संदिग्ध पेय पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर है। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना भी जरूरी है।
2. बाहर के खाने और कच्ची चीजों से बचें
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। ऐसे में स्ट्रीट फूड, खुले में रखे सलाद, कटे हुए फल और लंबे समय से रखा खाना गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
भोजन हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ ही खाएं। फल और सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना भी जरूरी है। इन सावधानियों से फूड-बॉर्न इंफेक्शन के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
3. मच्छरों से बचाव बेहद जरूरी
मानसून में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां गर्भावस्था के दौरान गंभीर चिंता का कारण बन सकती हैं।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें। शाम के समय पूरी बांह के कपड़े पहनना बेहतर है। मच्छरों से बचने के लिए किसी भी रिपेलेंट या अन्य उपाय का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा, ताकि गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित विकल्प ही चुना जा सके।
4. पैरों और त्वचा की सफाई का रखें ध्यान
बारिश के पानी और गीली मिट्टी के संपर्क में आने से पैरों में फंगल इंफेक्शन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बाहर से घर लौटने के बाद पैरों को साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं।

गीले कपड़े और जूते लंबे समय तक पहनने से बचें। घर के फर्श को भी साफ और सूखा रखने की कोशिश करें। इससे संक्रमण के साथ-साथ फिसलने और गिरने के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
5. बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें
मानसून में सर्दी, बुखार, उल्टी-दस्त या किसी अन्य संक्रमण की समस्या होने पर गर्भवती महिलाओं को खुद से दवा लेने से बचना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान कुछ दवाएं सुरक्षित नहीं मानी जातीं। इसलिए किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें।
तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी-दस्त, अत्यधिक कमजोरी या गर्भावस्था से जुड़ा कोई असामान्य लक्षण दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
खान-पान और आराम का भी रखें ध्यान
इन सावधानियों के साथ गर्भवती महिलाओं के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित डॉक्टर चेकअप भी जरूरी है। डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को शामिल किया जा सकता है। प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत के लिए डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।
इसके अलावा बहुत ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
थोड़ी सावधानी, मां और बच्चे दोनों के लिए बेहतर
मानसून के दौरान थोड़ी अतिरिक्त सतर्कता गर्भवती महिलाओं को कई तरह की परेशानियों से बचाने में मदद कर सकती है। साफ पानी पीना, ताजा और अच्छी तरह पका भोजन करना, मच्छरों से बचाव, व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना और किसी भी स्वास्थ्य समस्या में समय पर डॉक्टर से संपर्क करना इस मौसम में खास तौर पर जरूरी है।
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